Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस ए के चौधरी की अदालत में धनबाद के वासेपुर का डान फहीम खान की रिहाई न करने पर अवमानना याचिका की सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार के गृह सचिव, जेल आइजी और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब देने के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि फहीम खान के सजा पुनरीक्षण के आवेदन पर सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया।
फहीम खान का सजा और जेल का विवरण
फहीम खान को आजीवन कारावास की सजा मिली है और उन्होंने बीस साल से ज्यादा समय जेल में बिताया है। उनके खिलाफ कई गंभीर अपराध दर्ज हैं, जिसके कारण उन्हें वासेपुर का डान कहा जाता है। उनके रिहाई के लिए पहले भी सजा पुनरीक्षण बोर्ड में आवेदन किया गया था, लेकिन बोर्ड ने इसे निरस्त कर दिया। बोर्ड का तर्क था कि फहीम खान गैंगस्टर हैं और उनकी रिहाई से समाज की शांति भंग होने का खतरा है।
सजा पुनरीक्षण बोर्ड का पिछला फैसला और हाई कोर्ट का आदेश
कुछ साल बाद फहीम खान ने पुनः सजा रिहाई के लिए बोर्ड के पास आवेदन किया। इसके बावजूद बोर्ड ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। पहले दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सजा पुनरीक्षण के आवेदन पर उचित निर्णय लेने का आदेश सरकार को दिया गया था। इस आदेश के बावजूद भी सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर फहीम खान की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई।
अदालत ने मांगा राज्य सरकार का जवाब, रिहाई का मामला बना सस्पेंस
अदालत ने इस मामले में नोटिस जारी कर राज्य सरकार को 2 सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। इस कदम से फहीम खान की रिहाई को लेकर नया सस्पेंस बढ़ गया है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में हाई कोर्ट का निर्णय न सिर्फ फहीम खान के भविष्य को तय करेगा, बल्कि सजा पुनरीक्षण प्रक्रिया और राज्य सरकार के फैसलों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाएगा।
