Jharkhand: झारखंड में सरकारी शिक्षा का हाल प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक चिंता का विषय है। राज्य बनने के कई साल बाद भी शिक्षकों की प्रोन्नति लंबित है। इससे शिक्षकों में अनुत्साह फैल गया है और इसका असर सीधे शिक्षा और छात्रों पर पड़ता है। बिहार से अलग होने के बावजूद झारखंड में उच्च शिक्षकों की प्रोन्नति अभी तक पूरी नहीं हुई है।
प्रोन्नति न मिलने से उत्पन्न हुआ संघर्ष
राज्य में लगभग दो सौ शिक्षक अपनी प्रोन्नति के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। कई शिक्षक योग्य होने के बावजूद अगले स्तर पर नहीं पहुंच पाए हैं। इस स्थिति को लेकर झारखंड यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जुटान) ने आंदोलन शुरू किया है। शिक्षकों का कहना है कि 2018 के बाद नियुक्त शिक्षकों की प्रोन्नति अब तक लंबित है और विभाग को इसे शीघ्र पूरा करना चाहिए।
शिक्षक मांग रहे हैं न्याय और वेतन निर्धारण
शिक्षकों का कहना है कि 2018 के रेगुलेशन के अनुसार सभी योग्य शिक्षकों को अगले लेवल पर प्रोन्नत किया जाना चाहिए। कई शिक्षकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जो शिक्षा के क्षेत्र के लिए उचित संकेत नहीं है। अध्यक्ष जगदीश लोहरा ने कहा कि जिन शिक्षकों की प्रोन्नति 2023 में होनी थी, उनकी प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की गई है। पीएचडी करने वाले शिक्षकों की प्रोन्नति 4 साल और बिना पीएचडी वाले शिक्षकों की प्रोन्नति 6 साल में होनी चाहिए।
छात्रों और शिक्षा पर पड़ रहा प्रभाव
प्रोन्नति न मिलने से शिक्षक निरुत्साहित हो रहे हैं और इससे छात्रों को भी गुणवत्ता वाली शिक्षा नहीं मिल रही है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया है, मुकदमा लड़ने के लिए नहीं। विभाग और विश्वविद्यालय को इस मसले पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और लंबित प्रोन्नति प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए। शिक्षकों का संघर्ष अब न्याय मिलने तक जारी रहेगा।

