Jharkhand की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने बजट 2026 पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर बजट में जो वादे किए गए हैं, जिन्हें 2014 से बार-बार दोहराया जा रहा है, वे वास्तव में जमीन पर लागू होते हैं, तो यह स्वागत योग्य होगा। लेकिन उनका अनुभव है कि पिछले कई सालों से झारखंड जैसे राज्यों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया है। राज्य के फंड रोकना, बकाया भुगतान न करना और विकास परियोजनाओं में अनावश्यक बाधाएं डालना चिंता का विषय रहा है। इस बार भी केंद्र सरकार की मंशा लगभग वही दिख रही है।
झारखंड के साथ भेदभाव और विकास की राह में रोड़े
मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि पिछले छह सालों में इस भेदभाव को लगातार देखा गया है। सवाल यह है कि क्या इस समस्या का समाधान होगा या नहीं, इसका पता समय ही बताएगा। उन्होंने कहा कि यह बजट मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए कर संबंधी कोई ठोस राहत प्रदान नहीं करता। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि रोजगार कैसे सृजित होंगे और युवा वर्ग को किस प्रकार नौकरी मिलेगी। इसके अलावा मजदूरों के अधिकार लगातार कमजोर किए जा रहे हैं और महिलाओं के लिए भी कोई विशेष या प्रभावी पहल नहीं की गई है।
बजट में मध्यम वर्ग और महिलाओं के लिए राहत का अभाव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट 2026 पेश किया। इस बजट में उन्होंने आम आदमी, गरीब और किसानों के लिए कई घोषणाएं कीं, लेकिन मध्यम वर्ग को आयकर में कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। आयकर स्लैब पहले की तरह ही लागू रहेंगे। इसके साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन में भी कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को उम्मीद के अनुरूप राहत नहीं मिल पाई है।
बेरोजगारी और सामाजिक सुरक्षा पर बजट में खामियां
मंत्री दीपिका ने कहा कि इस बजट में रोजगार सृजन की रणनीति स्पष्ट नहीं है, जबकि देश के युवा वर्ग को रोजगार की सख्त जरूरत है। साथ ही, मजदूरों के अधिकारों में लगातार कटौती हो रही है, जो चिंता का विषय है। महिलाओं के लिए भी बजट में कोई विशेष और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे सामाजिक सुरक्षा और समानता को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे इन मुद्दों को गंभीरता से लें और बजट में इन पहलुओं को प्राथमिकता दें।

