Jharkhand Nikay Chunav: राज्य में नगर निकाय चुनाव अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही 23 फरवरी को कराए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि चुनाव की तारीख में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। परीक्षाओं का हवाला देकर चुनाव टालने की कोई योजना नहीं है। आयोग का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को तय समय पर पूरा करना जरूरी है। इसलिए चुनाव कार्यक्रम में कोई संशोधन नहीं होगा। हालांकि इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग और परीक्षा बोर्ड की चिंताएं बढ़ गई हैं। कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं उसी तारीख के आसपास निर्धारित हैं। ऐसे में छात्रों शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सरकार की प्राथमिकता यह है कि चुनाव भी सुचारु रूप से हों और छात्रों का भविष्य भी प्रभावित न हो। इसी संतुलन को साधने के लिए आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
23 फरवरी को नगर निकाय चुनाव के साथ ही झारखंड एकेडमिक काउंसिल की इंटरमीडिएट हिंदी विषय की परीक्षा भी निर्धारित है। इसी दिन आईसीएसई बोर्ड की कक्षा बारहवीं की केमिस्ट्री परीक्षा भी होनी है। इसके अलावा कक्षा आठवीं नौवीं और ग्यारहवीं की परीक्षाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। कक्षा आठवीं की परीक्षाएं 24 फरवरी से शुरू होनी हैं जो मतदान के ठीक अगले दिन है। कक्षा ग्यारहवीं की परीक्षाएं 25 से 27 फरवरी तक प्रस्तावित हैं। कक्षा नौवीं की परीक्षाएं 28 फरवरी से 2 मार्च तक चलेंगी। चूंकि अधिकतर स्कूलों को मतदान केंद्र बनाया जाएगा और शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगाई जाएगी। इसलिए परीक्षाओं का आयोजन तय कार्यक्रम के अनुसार कर पाना मुश्किल हो सकता है।
शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल को निर्देश दिया है कि वह परीक्षा तिथियों की समीक्षा करे। उन्होंने कहा है कि नगर निकाय चुनाव का परीक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भेजा जाएगा। इस बीच यह भी खबर है कि जैक खुद परीक्षाओं की तिथियां आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। 23 फरवरी को एक एसएससी की प्रतियोगी परीक्षा भी प्रस्तावित है। इससे परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। शिक्षा विभाग की कोशिश है कि छात्रों को किसी तरह की असुविधा न हो और परीक्षाएं शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराई जा सकें।
नगर निकाय चुनाव की तारीख में बदलाव करना आसान प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए सबसे पहले राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी जरूरी होती है। उसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति भी लेनी पड़ती है। इन सभी स्तरों से अनुमति लेना समय लेने वाला काम है। इसलिए अंतिम समय में चुनाव कार्यक्रम बदलना लगभग असंभव माना जा रहा है। इसी कारण विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षाओं की तिथियों में बदलाव ही व्यावहारिक समाधान है। जैक द्वारा परीक्षा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला छात्रों के हित में माना जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में यही सबसे संतुलित रास्ता है। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी और शिक्षा व्यवस्था भी सुचारु रूप से चल सकेगी।

