झारखंड के जमशेदपुर में 13 जनवरी को हुई सनसनीखेज घटना में नामी उद्योगपति और एशिया उपाध्यक्ष देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी का अपहरण हो गया था। पूरे शहर में चिंता की लहर दौड़ गई थी और परिजन लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहे थे। अब 15 दिन बाद सोमवार को पुलिस ने कैरव को सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंप दिया है, जिससे परिवार में राहत की सांस चली।
हालांकि, अभी इस मामले को लेकर कई सवाल अनसुलझे हैं। कैरव अचानक कैसे लापता हुआ और इतने दिनों बाद अचानक सुरक्षित कैसे मिला, इस पर अभी तक पुलिस या परिवार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राज्य के डीजीपी तदाशा मिश्रा ने भी इस मामले का व्यक्तिगत तौर पर जायजा लिया था और जल्द बरामदगी के निर्देश दिए थे।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच जारी है और बरामदगी से जुड़ी सारी जानकारियों की पुष्टि के बाद ही कोई सार्वजनिक बयान दिया जाएगा। जमशेदपुर के लोग कैरव की सुरक्षित वापसी से जरूर खुश हैं, लेकिन मामले की गुत्थी सुलझाने का इंतजार कर रहे हैं।
परिवार की चुप्पी और आधिकारिक बयान का अभाव इस मामले को और भी रहस्यमय बना रहा है। इस घटना ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और अपहरण जैसी घटनाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैरव गांधी की सकुशल बरामदगी एक बड़ी राहत है, लेकिन आगे की जांच में ही स्पष्ट होगा कि आखिर क्या हुआ था और कौन थे इस कहानी के पीछे।

