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Jharkhand हाईकोर्ट में आरक्षण रोस्टर पर बड़ा विवाद, अगले सुनवाई में हो सकता है फैसला

Jharkhand हाईकोर्ट ने आज 21 जनवरी को शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में मेयर और नगर परिषद अध्यक्ष के पदों के आरक्षण रॉस्टर को लेकर दायर याचिका की सुनवाई की। याचिकाकर्ता के वकील अभय कुमार मिश्रा ने अदालत में यह तर्क रखा कि आरक्षण के लिए पदों का आवंटन संविधान में निर्धारित रॉस्टर के क्रम के अनुसार नहीं किया गया है, जो एक अन्यायपूर्ण कदम है। इस मामले में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की गई है। इस याचिका का मुख्य फोकस राज्य स्तर पर आरक्षण रॉस्टर की वैधता पर है, जिसमें आरोप है कि जनसंख्या के अनुसार संतुलन नहीं रखा गया है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने 9 जनवरी, 2026 को शहरी स्थानीय निकायों के लिए आरक्षण सूची जारी की। इस सूची में कई स्थानों पर आरक्षण को लेकर असंतोष और विवाद उभरे हैं। सूची के अनुसार, रांची मेयर का पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि धनबाद मेयर का पद अनारक्षित रखा गया है। गिरिडीह मेयर का पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। हजारीबाग में अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 के लिए आरक्षण है, और मेडिनी नगर (पलामू) में महिलाओं के लिए आरक्षण है। देवघर, चास, और बोकारो के पद अनारक्षित हैं। इस सूची के बाद चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन रॉस्टर विवाद अभी भी जारी है।

धनबाद नगर निगम में मेयर पद को अनारक्षित रखने का फैसला विवादास्पद बना हुआ है। 9 जनवरी की सूची में इसे अनारक्षित घोषित किया गया, जबकि यहां अनुसूचित जाति की संख्या महत्वपूर्ण है। इस वजह से कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जो आरक्षण के दो वर्गों में सीटों के विभाजन को चुनौती देती हैं। नवंबर 2025 में एक याचिका की सुनवाई हुई थी, जिसमें सरकार से जवाब मांगा गया था, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई नया निर्णय नहीं आया है, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। वहीं, गिरिडीह में मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करने के फैसले को भी चुनौती मिली है। याचिकाकर्ता मोहम्मद नसीम का तर्क है कि यहां ओबीसी की आबादी 65 प्रतिशत से अधिक है, इसलिए यह पद ओबीसी के लिए आरक्षित होना चाहिए। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हो चुकी है और निर्णय सुरक्षित रखा गया है।

रांची, हजारीबाग और देवघर जैसे जिलों में भी रॉस्टर से जुड़े मुद्दे राज्य के आरक्षण नीति से प्रभावित हो रहे हैं। इससे पहले हाईकोर्ट ने सरकार को ओबीसी आरक्षण के ट्रिपल टेस्ट के बहाने चुनाव टालने पर फटकार लगाई थी और चार महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया था। जनवरी में अंतिम रॉस्टर जारी होने के बाद कई इलाकों से विवाद सामने आए हैं, जिनका संबंध मुख्य रूप से आरक्षण रॉस्टर की वैधता और जनसंख्या के आधार पर आरक्षण आवंटन से है। अगली सुनवाई में इन विवादों पर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और जल्द ही चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना है।

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