Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में साइबर अपराधियों ने दिन-ब-दिन अपना आतंक बढ़ा दिया है। बीते 24 घंटों में ही यहां पांच बड़े ठगी के मामले सामने आए हैं, जिनसे पुलिस प्रशासन और आम जनता दोनों हैरान हैं। अब साइबर अपराधी सिर्फ अनपढ़ लोगों को ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से सक्षम लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। इन मामलों में अपराधियों ने फर्जी आईएएस अधिकारियों के नाम पर फर्नीचर बेचना, बिना ओटीपी के क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन खरीदारी करना, और जमीन पर मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करना शामिल है। इन पांच घटनाओं में रांची के नागरिकों को करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
पहला मामला लेना वर्मा का है, जिन्हें इंस्टाग्राम पर एक ‘पार्ट टाइम जॉब’ का विज्ञापन दिखा और वे एक टेलीग्राम ग्रुप में शामिल हुईं। शुरुआत में उनके खाते में कुछ पैसे ‘प्रॉफिट’ के तौर पर जमा कर विश्वास जीत लिया गया। फिर उनसे निवेश के नाम पर ₹8.08 लाख की राशि जमा करने को कहा गया, लेकिन पैसे वापस मांगने पर और अधिक रकम की मांग की गई। दूसरा मामला संतोष तमांग का है, जिनके RBL क्रेडिट कार्ड की चोरी कर तीन मोबाइल फोन बिना किसी ओटीपी के ₹1.19 लाख की ऑनलाइन खरीदारी की गई। ये ट्रांजैक्शन पटना के एक व्यापारी के जरिए हुई और संतोष को तब पता चला जब उनका कार्ड लिमिट खत्म हो गया।
तीसरे मामले में दिलीप ओरांव को फोन आया कि उनकी जमीन पर मोबाइल टावर लगेगा और इसके लिए उनसे 100 स्क्वायर फीट जमीन मांगी गई। पहले वाणिज्यिक लाइसेंस के नाम पर पैसा लिया गया, फिर ₹15 लाख भेजने के बहाने जीएसटी और टीडीएस देने को कहा गया। दिलीप इस धोखे में आ गए और ₹4.20 लाख गंवा बैठे। चौथे मामले में पालो टियू को एसबीआई अधिकारी बनकर कॉल आया कि अगर तुरंत ई-केवाईसी नहीं किया गया तो खाता बंद कर दिया जाएगा। डर के मारे पालो ने अपने आधार, पैन और कार्ड की जानकारी साझा कर दी, जिसके बाद अपराधियों ने उनके खाते से ₹3.05 लाख उड़ा लिए।
पांचवें मामले में श्यामल चक्रवर्ती को फेसबुक पर शिक्षा विभाग के सचिव (आईएएस अधिकारी) के नाम से मैसेज आया। फर्जी अधिकारी ने बताया कि उनके एक दोस्त (सीआरपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट) का ट्रांसफर हुआ है और वह फर्नीचर बेच रहे हैं। श्यामल ने QR कोड के माध्यम से ₹2.86 लाख अलग-अलग किश्तों में भेजे, लेकिन जैसे ही पैसा गया, धोखेबाज ने अपना फेसबुक और व्हाट्सएप अकाउंट डिलीट कर दिया।
साइबर विशेषज्ञों ने जनता को आगाह किया है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी बड़े अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति के नाम पर आने वाले संदेशों पर बिना सावधानी के विश्वास न करें। खासकर “लाइक और शेयर” के जरिए कमाई का झांसा देने वाले फ्रॉड से बचें क्योंकि कोई भी कंपनी इतनी बड़ी रकम केवल लाइक या रेटिंग देने के लिए नहीं देती। अब अपराधी बिना ओटीपी के भी कार्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का विकल्प बंद रखना चाहिए। साथ ही, बैंक कभी भी फोन पर केवाईसी के लिए दस्तावेज या पासवर्ड नहीं मांगते हैं। किसी भी संदेहास्पद गतिविधि को तुरंत रिपोर्ट करें।
अगर आप किसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं तो देर न करें और तुरंत 1930 नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि अगर धोखाधड़ी की सूचना पहले 1-2 घंटे (जिसे “गोल्डन आवर्स” कहते हैं) में मिल जाती है तो पैसे वापस मिलने की संभावना अधिक होती है। इसलिए जागरूकता बढ़ाएं और इंटरनेट पर अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें ताकि आप इन अपराधियों के जाल में फंसे बिना सुरक्षित रह सकें।
