राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर एक अहम और दूरगामी फैसला सामने आया है। झारखंड हाईकोर्ट ने खुले में मांस और चिकन की बिक्री पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार को केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक झारखंड अपने स्वतंत्र नियम नहीं बना लेता, तब तक केंद्र के नियम पूरे राज्य में बिना किसी ढील के लागू किए जाएं।
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में बताया गया कि राज्य के कई इलाकों में बकरियों और मुर्गियों का खुले में वध किया जा रहा है और दुकानों पर मांस खुले रूप में लटकाया जाता है। इससे न केवल स्वच्छता मानकों का उल्लंघन होता है बल्कि आम नागरिकों विशेषकर बच्चों और छात्रों पर इसका नकारात्मक मानसिक प्रभाव भी पड़ता है।
अदालत ने राज्य सरकार और रांची नगर निगम को तत्काल ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि खुले में मांस बिक्री से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है और खाद्य गुणवत्ता की निगरानी के लिए कोई प्रभावी तंत्र नजर नहीं आता। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य में खाद्य सुरक्षा के लिए मॉडल नियमों का मसौदा तैयार किया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने दो टूक कहा कि नियम बनने तक केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों का ही कड़ाई से पालन कराया जाए।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि स्कूलों के पास खुले में मांस बिक्री से बच्चों के मन पर गलत प्रभाव पड़ता है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं। अदालत ने इन चिंताओं को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख 27 फरवरी तय की है।

