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Ranchi: डीवीसी की एनओसी में फंसी 6 जिलों की जलापूर्ति योजनाएं, 104 करोड़ रुपये बकाया होने से अटका काम

Ranchi : झारखंड के छह जिलों में पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं पर संकट, डीवीसी ने 104 करोड़ रुपये के जल शुल्क बकाया का हवाला देकर एनओसी जारी करने से किया इनकार

Ranchi : झारखंड के छह जिलों की महत्वपूर्ण जलापूर्ति योजनाएं डीवीसी की एनओसी नहीं मिलने से प्रभावित हैं। 104 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के कारण डोमचांच, झुमरी तिलैया, धनबाद, धनवार, बड़की सरैया और जामताड़ा की परियोजनाएं अटकी हुई हैं।

रांची: झारखंड के छह जिलों में हजारों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजनाएं दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण अटक गई हैं। जल शुल्क मद में 104 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान को लेकर डीवीसी और राज्य सरकार के बीच चल रही प्रक्रिया के कारण परियोजनाओं की रफ्तार थम गई है।

प्रभावित परियोजनाओं में डोमचांच, झुमरी तिलैया, धनबाद, बड़की सरैया, धनवार और जामताड़ा जलापूर्ति योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के लिए आवश्यक वाटर ड्रॉवल और इंटेक वेल निर्माण से संबंधित करार अभी तक पूरा नहीं हो पाया है, जिसके चलते निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

104 करोड़ रुपये बकाया होने से डीवीसी का सख्त रुख

डीवीसी ने राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से बताया है कि विभिन्न परियोजनाओं के तहत जल शुल्क मद में कुल 104 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। निगम का कहना है कि जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता या भुगतान को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक नई परियोजनाओं के लिए एनओसी जारी नहीं की जाएगी।

डीवीसी के इस रुख का सीधा असर उन जलापूर्ति योजनाओं पर पड़ रहा है, जिनका उद्देश्य लाखों लोगों तक नियमित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। अधिकारियों के अनुसार एनओसी के बिना न तो जल निकासी की अनुमति मिल सकती है और न ही इंटेक वेल निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

मुख्यमंत्री स्तर पर हुआ हस्तक्षेप

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव के स्तर पर हस्तक्षेप किया गया। इसके बाद झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (जुडको) ने बकाया राशि के भुगतान की दिशा में पहल करते हुए 28 मई 2026 को 59.43 लाख रुपये की अंतर राशि डीवीसी को जमा कराई।

इस भुगतान के बाद करार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल शुरू हुई है। हालांकि अभी भी कई परियोजनाओं को अंतिम स्वीकृति और एनओसी का इंतजार है। संबंधित विभागों द्वारा डीवीसी के साथ लगातार समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि परियोजनाओं को जल्द से जल्द गति मिल सके।

जामताड़ा और झुमरी तिलैया परियोजनाएं अब भी प्रतीक्षा में

भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद जामताड़ा और झुमरी तिलैया सहित कई महत्वपूर्ण जलापूर्ति योजनाओं को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। अधिकारियों का मानना है कि डीवीसी से करार और एनओसी प्राप्त होने के बाद ही निर्माण कार्य में तेजी आएगी और योजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी हो सकेंगी।

जल संसाधन और पेयजल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार शेष तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयासरत है। सरकार की प्राथमिकता है कि प्रभावित जिलों में जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

इन छह जलापूर्ति योजनाओं पर पड़ा असर

डीवीसी की एनओसी नहीं मिलने के कारण निम्नलिखित योजनाओं का कार्य प्रभावित हुआ है:

  • डोमचांच जलापूर्ति योजना
  • झुमरी तिलैया जलापूर्ति योजना
  • धनबाद जलापूर्ति योजना
  • बड़की सरैया जलापूर्ति योजना
  • धनवार जलापूर्ति योजना
  • जामताड़ा जलापूर्ति योजना

इन परियोजनाओं के पूरा होने से हजारों परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने की उम्मीद थी। लेकिन प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनों के कारण इन योजनाओं का लाभ फिलहाल लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

जलापूर्ति परियोजनाओं का महत्व

झारखंड के कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में पेयजल संकट एक बड़ी समस्या बन जाता है। ऐसे में जलापूर्ति योजनाओं का समय पर पूरा होना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल जल संकट कम होगा बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

सरकार द्वारा जल जीवन मिशन और अन्य योजनाओं के माध्यम से राज्य में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन डीवीसी की एनओसी और बकाया भुगतान से जुड़े मुद्दों के कारण कई परियोजनाएं अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

क्या है मुख्य बाधा?

जलापूर्ति योजनाओं में देरी की प्रमुख वजहें निम्नलिखित हैं:

  • डीवीसी पर जल शुल्क मद में 104 करोड़ रुपये का बकाया।
  • वाटर ड्रॉवल और इंटेक वेल निर्माण के लिए एनओसी अनिवार्य।
  • भुगतान और करार प्रक्रिया पूरी नहीं होने से निर्माण कार्य प्रभावित।
  • अंतिम स्वीकृति और तकनीकी मंजूरी में देरी।

सरकार कर रही समाधान की कोशिश

राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां अब इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि बकाया भुगतान और करार प्रक्रिया पूरी होने के बाद डीवीसी आवश्यक एनओसी जारी करेगा, जिससे रुकी हुई परियोजनाओं को नई गति मिल सकेगी।

फिलहाल हजारों लोगों की उम्मीदें इन जलापूर्ति योजनाओं से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में सरकार और डीवीसी के बीच जल्द सहमति बनना जरूरी माना जा रहा है ताकि प्रभावित जिलों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

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