Indian Railways : वंदे भारत और वंदे भारत स्लीपर के 150 नए रैक होंगे तैयार, ट्रेनों में पहली बार विमान जैसी ब्लैक बॉक्स तकनीक और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाएगा।
Indian Railways यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सफर देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रेलवे 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली सेमी हाई स्पीड ट्रेनों के विकास पर काम शुरू कर रहा है। इसके साथ ही ट्रेनों में विमान जैसी ब्लैक बॉक्स तकनीक, ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनिटरिंग सिस्टम और स्मार्ट मेंटेनेंस व्यवस्था लागू की जाएगी।
नई दिल्ली। देश में बुलेट ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है, वहीं भारतीय रेलवे अब 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली सेमी हाई स्पीड ट्रेनों की तैयारी में जुट गया है। रेलवे की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अत्याधुनिक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में 100 वंदे भारत ट्रेन रैक और 50 वंदे भारत स्लीपर रैक तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा अमृत भारत 3.0 संस्करण को भी जल्द पटरी पर उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। रेलवे 220 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ने वाली नई पीढ़ी की सेमी हाई स्पीड ट्रेनों के रैक विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
रेलवे की इस नई पहल में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी के तहत यात्री ट्रेनों में पहली बार विमान जैसी ब्लैक बॉक्स तकनीक लागू करने की योजना बनाई गई है। विमान में ब्लैक बॉक्स दुर्घटना के कारणों और अंतिम क्षणों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। इसी तरह रेलवे ट्रेनों में फायर डिटेक्शन सिस्टम और फायर डिटेक्शन सप्रेशन सिस्टम से जुड़े ब्लैक बॉक्स लगाएगा, जो आग लगने से पहले और बाद की सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों का डेटा रिकॉर्ड करेगा।
यह ब्लैक बॉक्स सिस्टम आग से संबंधित ट्रिगर्स, उपकरणों की स्थिति और अन्य तकनीकी पैरामीटर को सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड करेगा। इससे किसी भी घटना की जांच अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। रेलवे का मानना है कि यह तकनीक दुर्घटनाओं की रोकथाम और जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाएगी।
रेलवे ट्रेनों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देते हुए वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों में ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OBCMS) भी लागू करेगा। यह एक उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीक है, जो ट्रेन के पहियों, बेयरिंग और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की रियल टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग करेगी। इससे तकनीकी खराबियों का समय रहते पता चल सकेगा और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (यांत्रिक-इंजीनियर कोचिंग) प्रांजल मिश्रा की ओर से भेजे गए पत्र के बाद विभिन्न रेलवे जोनों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियां तैयार कर ली हैं। इन प्रस्तावों पर जल्द होने वाली प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंताओं (PCME) की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
कॉन्फ्रेंस में ट्रेनों के मेंटेनेंस को पूरी तरह डिजिटाइज करने, स्मार्ट मेंटेनेंस सिस्टम लागू करने और कम समय में रैक मेंटेनेंस सुनिश्चित करने पर भी विचार किया जाएगा। इसके अलावा नए कोचिंग डिपो और कोचिंग टर्मिनलों के निर्माण तथा पुराने डिपो के आधुनिकीकरण की योजनाओं पर भी चर्चा होगी।
रेलवे कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसमें दुर्घटनाओं, बेपटरी होने की घटनाओं और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण शामिल होगा। साथ ही गरीब रथ ट्रेनों के रैक के बेहतर उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेलवे की यह योजना सफल होती है तो भारत में रेल यात्रा का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। तेज रफ्तार, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली और डिजिटल मॉनिटरिंग से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव मिलेगा। यह पहल भारतीय रेलवे को वैश्विक स्तर पर आधुनिक रेल नेटवर्क की श्रेणी में और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
