झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा की दो खाली हो रही सीटों में से एक सीट पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार प्रणव झा को मैदान में उतारा है। सोमवार को राजधानी रांची स्थित विधानसभा परिसर में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान महागठबंधन की एकजुटता खुलकर देखने को मिली, जहां कांग्रेस के साथ झामुमो, राजद और वामपंथी दलों के विधायक और नेता भी उनके समर्थन में मौजूद रहे।
कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर नामांकन दाखिल करने पहुंचे प्रणव झा ने कुल दो सेट में अपना आवेदन पत्र जमा किया। दोनों सेटों में विभिन्न दलों के विधायकों के प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर शामिल किए गए, जिससे यह साफ संदेश देने की कोशिश की गई कि महागठबंधन पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतर रहा है।
नामांकन के पहले सेट में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने प्रस्तावक की भूमिका निभाई। इसमें विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, पूर्व वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव, विधायक भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोंगाड़ी, सुरेश बैठा और कुमार जय मंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह शामिल रहे।
वहीं दूसरे सेट में महागठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं ने समर्थन दिया। इस सूची में सबसे पहला नाम झामुमो विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन का रहा। इसके अलावा राजद विधायक संजय प्रसाद यादव और सुरेश पासवान के साथ-साथ झामुमो के मंगल कालिंदी, दीपक बिरुवा, निरल पूर्ति, भूषण तिर्की, सुखराम उरांव और नरेश प्रसाद सिंह ने भी प्रस्तावक बनकर समर्थन जताया। माले विधायक अरुप चटर्जी भी इस सूची में शामिल रहे।
कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी ने भी नामांकन को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी अपने एक करीबी के इलाज के सिलसिले में बेंगलुरु गए हुए थे, जिस कारण वे आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं कर सके। इसके बावजूद सोमवार को विधानसभा परिसर में उनकी मौजूदगी देखी गई, जिससे पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान राज्यसभा चुनाव के लिए नियुक्त पर्यवेक्षक भूपेश बघेल भी मौजूद रहे। उनके साथ अजय शर्मा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और प्रदेश कांग्रेस की पूरी टीम ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। कांग्रेस के सभी विधायक भी विधानसभा पहुंचे और उम्मीदवार के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो झारखंड में राज्यसभा चुनाव सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। महागठबंधन जिस तरह से एकजुट नजर आया, उससे विपक्ष और अन्य दलों को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है कि गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में है।
अब राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दूसरी सीट को लेकर कौन-कौन से राजनीतिक समीकरण बनते हैं और चुनावी मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।