Jharkhand Transfer Controversy : दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तबादले के बाद बढ़ा विवाद, स्वास्थ्य मंत्री के आदेश के बाद भड़के लिपिक पर सहकर्मी को धमकाने का आरोप, प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
Jharkhand Transfer Controversy : झारखंड के दुमका स्थित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तबादले के बाद एक लिपिक द्वारा सहकर्मी को कथित तौर पर जान से मारने और हाथ-पैर तोड़ने की धमकी देने का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य मंत्री के आदेश पर हुए तबादले के बाद शुरू हुए विवाद ने अब प्रशासनिक और कानूनी रूप ले लिया है।
तबादले के बाद विवाद ने पकड़ा तूल
झारखंड के दुमका जिले में स्थित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक लिपिक के तबादले के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। आरोप है कि तबादले से नाराज लिपिक निशांत कुमार सिंह ने अपने ही सहकर्मी को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी, जिससे पूरे कार्यालय में तनाव का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के आदेश पर फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कार्यरत लिपिक निशांत कुमार सिंह का तबादला रानीश्वर प्रखंड के ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आमजोड़ा कर दिया गया। यह तबादला मंत्री के औचक निरीक्षण के बाद हुआ, जिसके बाद विवाद की शुरुआत हुई।
सहकर्मी को दी कथित धमकी
आरोप है कि तबादले के आदेश से नाराज होकर निशांत कुमार सिंह ने सिविल सर्जन कार्यालय में कार्यरत लिपिक राजशेखर पांडेय को कथित तौर पर हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, आरोप है कि उसने यह भी कहा कि यदि उसके स्थान पर कोई अन्य लिपिक योगदान देता है, तो उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल की छत से नीचे फेंक देगा।
इस कथित धमकी के बाद पीड़ित कर्मचारी राजशेखर पांडेय ने पूरे मामले की लिखित शिकायत सिविल सर्जन को दी और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। शिकायत के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई।
सिविल सर्जन ने मांगी कार्रवाई
मामले को गंभीर मानते हुए सिविल सर्जन डॉ. कमलेश्वर प्रसाद ने अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को पत्र लिखकर आरोपी लिपिक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पत्रांक 1452, दिनांक 6 जून 2026 के माध्यम से इस घटना की जानकारी देते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं कार्यालय की शांति व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
सिविल सर्जन ने बताया कि पूरे मामले की सूचना उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी को भी भेज दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की समीक्षा की जा रही है और आवश्यक कानूनी कदम उठाने की प्रक्रिया जारी है।
कर्मचारी संघ तक पहुंचा मामला
पीड़ित लिपिक राजशेखर पांडेय ने अपनी सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, जिला शाखा के जिला सचिव को भी लिखित सूचना दी है। इससे यह मामला अब कर्मचारी संगठनों तक भी पहुंच गया है।
कार्यालय के कर्मचारियों के बीच इस घटना के बाद भय और असहजता का माहौल बताया जा रहा है। कई कर्मचारियों का मानना है कि कार्यस्थल पर इस तरह की धमकी गंभीर प्रशासनिक चुनौती बन सकती है।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि 1 जून को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी अचानक निरीक्षण के लिए फूलो झानो मेडिकल College एवं अस्पताल पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित लिपिक निशांत कुमार सिंह से कुछ प्रशासनिक और कार्य संबंधी सवाल पूछे थे।
सूत्रों के मुताबिक, मंत्री पूछे गए सवालों के जवाब से संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद उन्होंने तत्काल प्रभाव से लिपिक के तबादले का निर्देश दिया। इसी आदेश के तहत निशांत कुमार सिंह को दुमका से आमजोड़ा स्थित ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
अब आरोप है कि इसी तबादले से नाराज होकर संबंधित लिपिक ने अपने सहकर्मी को धमकी दी। फिलहाल प्रशासन और पुलिस मामले की जांच कर रहे हैं और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति, अनुशासन और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां प्रशासन कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं कर्मचारी सुरक्षा और कार्यस्थल के माहौल को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या आरोपी कर्मचारी पर कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं।
