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Thursday, June 4, 2026
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Hazaribagh Medical College : बिजली गुल, सिस्टम फेल! टॉर्च की रोशनी में चला इलाज, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

Hazaribagh Medical College : शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देर रात बिजली आपूर्ति ठप होने से मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी, बैकअप सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

Hazaribagh Medical College : हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देर रात बिजली कटने से पूरे परिसर में अंधेरा छा गया। मरीजों का इलाज मोबाइल और टॉर्च की रोशनी में करना पड़ा। घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

Hazaribagh Medical College में बिजली गुल, मरीजों के बीच मची अफरा-तफरी

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देर रात अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया। इस अप्रत्याशित स्थिति के कारण मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली कटते ही अस्पताल के वार्ड, इमरजेंसी यूनिट और उपचार कक्षों में अंधेरा फैल गया। अचानक उत्पन्न हुई इस स्थिति ने मरीजों और उनके परिजनों के बीच चिंता और अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। कई गंभीर मरीजों के परिजन खुद मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर उनकी देखभाल करते दिखाई दिए।

टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में चला इलाज

बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद अस्पताल में कई जगहों पर प्राथमिक उपचार मोबाइल फोन की टॉर्च और इमरजेंसी लाइट के सहारे किया गया। स्वास्थ्यकर्मियों को इलाज के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग मरीजों, छोटे बच्चों और गंभीर रोगियों के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई। अंधेरे के कारण मरीजों की निगरानी, दवा वितरण और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में भी व्यवधान की खबर सामने आई।

बैकअप सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था और बैकअप बिजली प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में अगर बिजली जाने के बाद भी बैकअप व्यवस्था प्रभावी रूप से काम नहीं करती, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता करार दिया है। उनका कहना है कि जब मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े अस्पताल में ऐसी स्थिति है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों पर उठे सवाल

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आवश्यक संसाधनों और व्यवस्थाओं की कमी अब भी बनी हुई है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में मजबूत बैकअप सिस्टम और नियमित तकनीकी जांच अनिवार्य होनी चाहिए।

लोगों का कहना है कि बिजली संकट जैसी घटनाएं सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों की परीक्षा भी होती हैं। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और इलाज प्रभावित होना गंभीर चिंता का विषय है।

जांच में जुटा अस्पताल प्रशासन और बिजली विभाग

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और बिजली विभाग ने बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारणों का पता लगाया जा रहा है और जल्द ही स्थिति को स्पष्ट किया जाएगा।

हालांकि, इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन, आपातकालीन तैयारियों और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। लोगों की मांग है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अस्पतालों में मजबूत और भरोसेमंद बैकअप सिस्टम सुनिश्चित किया जाए।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस

हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की यह घटना सिर्फ बिजली कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में तकनीकी संसाधनों की मजबूती और समय-समय पर सिस्टम ऑडिट जरूरी है, ताकि मरीजों को कभी भी ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

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