Jharkhand News : गुमला और बेड़ो के सीमावर्ती जंगल इलाके में चलाया गया विशेष अभियान, हत्या और रंगदारी समेत कई मामलों में वांछित था रामदेव उरांव
Jharkhand News : झारखंड में 25 वर्षों से फरार चल रहे कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव ने आखिरकार पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। रांची और गुमला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर उसे पकड़ा गया। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर मामलों में कई केस दर्ज हैं।
झारखंड में लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों के खिलाफ पुलिस लगातार अभियान चला रही है। इसी क्रम में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। करीब 25 वर्षों से पुलिस की पकड़ से दूर चल रहे अपराधी रामदेव उरांव ने आखिरकार पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। बताया जा रहा है कि उसने गुमला जिले के जंगल क्षेत्र, जो बेड़ो और गुमला के सीमावर्ती इलाके में पड़ता है, वहां पुलिस के समक्ष सरेंडर किया।
सूत्रों के अनुसार रामदेव उरांव पिछले कई वर्षों से लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए जंगलों और दूरदराज के इलाकों में छिपकर रह रहा था। कई बार पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए अभियान चलाया, लेकिन हर बार वह सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर भाग निकलने में सफल रहा।
पुलिस की संयुक्त रणनीति से मिली सफलता
जानकारी के मुताबिक रांची और गुमला पुलिस ने संयुक्त रूप से एक विशेष रणनीति बनाई थी। दोनों जिलों की पुलिस ने सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर अभियान चलाया गया, जिसके बाद रामदेव उरांव को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर होना पड़ा।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय से फरार अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का यह बड़ा परिणाम है। संयुक्त कार्रवाई के जरिए पुलिस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि चाहे अपराधी कितने भी समय तक कानून से बचते रहें, लेकिन अंततः कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं होगा।
हत्या और रंगदारी समेत कई गंभीर मामले दर्ज
रामदेव उरांव के खिलाफ हत्या, रंगदारी, धमकी और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में कई केस दर्ज बताए जा रहे हैं। लंबे समय से वह पुलिस रिकॉर्ड में वांछित अपराधियों की सूची में शामिल था। उसकी गिरफ्तारी या सरेंडर को लेकर पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि रामदेव उरांव के आत्मसमर्पण के बाद अब उससे पूछताछ की जाएगी, जिससे उसके नेटवर्क, सहयोगियों और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
जंगल इलाकों में अपराध नियंत्रण की चुनौती
झारखंड के कई सीमावर्ती और जंगल क्षेत्रों में अपराधियों की गतिविधियां लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी रही हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई अपराधी इन इलाकों को छिपने के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पुलिस की संयुक्त कार्रवाई और लगातार अभियान को कानून-व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में स्थानीय सूचना तंत्र और अंतरजिला समन्वय पुलिस के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित होता है। रामदेव उरांव के मामले में भी यही रणनीति कारगर साबित हुई।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों की ओर से अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अब उसके पुराने मामलों और नेटवर्क की भी समीक्षा कर रही है।
रामदेव उरांव का 25 वर्षों बाद सरेंडर झारखंड पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि लगातार प्रयास और संयुक्त रणनीति से लंबे समय से फरार अपराधियों तक भी पहुंचा जा सकता है।
