Jharkhand News : ग्रेड पे आधारित मानदेय, स्थायी समायोजन और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर 12 मार्च से जारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
Jharkhand News : झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। संघ ने कहा है कि अब विभागीय अधिकारियों के साथ कोई वार्ता नहीं होगी और केवल मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ही बातचीत स्वीकार की जाएगी। 1 जून से राज्यभर में चरणबद्ध जनआंदोलन, महाधरना और आक्रोश मार्च आयोजित किए जाएंगे।
रांची : झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि अब किसी विभागीय अधिकारी के साथ बातचीत नहीं की जाएगी और आगे केवल मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ही वार्ता होगी। संघ का कहना है कि विभागीय स्तर पर बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे कर्मचारियों का भरोसा टूट चुका है।
संघ के अनुसार राज्यभर के मनरेगा कर्मी 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उनकी मुख्य मांगों में ग्रेड पे आधारित मानदेय लागू करना, स्थायी समायोजन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। इस आंदोलन के दौरान 13 और 14 मई को मनरेगा आयुक्त के साथ वार्ता हुई थी, जबकि 25 मई को ग्रामीण विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में विस्तृत बैठक आयोजित की गई थी। इससे पहले 21 मई को संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण विकास मंत्री से भी मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों को रखा था।
संघ का दावा है कि वार्ता के दौरान चार प्रमुख मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी। इनमें मनरेगा कर्मियों को ग्रेड पे आधारित मानदेय देने, हड़ताल अवधि का मानदेय जारी करने, मृत कर्मियों के आश्रितों को नियुक्ति में वरीयता देने और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे। हालांकि संघ का आरोप है कि बाद में विभाग द्वारा तैयार किए गए सहमति पत्र के मसौदे में जानबूझकर अस्पष्ट भाषा और शब्दजाल का इस्तेमाल किया गया, ताकि मांगों को स्पष्ट रूप से लागू न करना पड़े।
संघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि विभाग की मंशा समस्याओं का समाधान निकालने की नहीं थी, बल्कि किसी तरह आंदोलन और हड़ताल को समाप्त कराना था। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2024 के आंदोलन के बाद भी लिखित समझौता हुआ था, लेकिन आज तक उसे लागू नहीं किया गया। इसी कारण अब विभागीय आश्वासनों पर मनरेगा कर्मियों का विश्वास लगभग समाप्त हो चुका है।
इधर 25 मई को हुई वार्ता विफल होने के बाद विभाग द्वारा जारी किए गए पत्रों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाने, “नो वर्क नो पे” लागू करने और हड़ताली कर्मियों पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इस पर संघ ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे दबाव और धमकी वाले पत्रों से कर्मचारी डरने वाले नहीं हैं। संघ का कहना है कि सरकार की इस कार्रवाई से आंदोलन और मजबूत हुआ है।
संघ ने सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा है कि अब प्रखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर तक व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा। आंदोलन के तहत राज्य के सभी जिलों में प्रतिदिन धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही 1 जून से ग्रामीण विकास मंत्री के महागामा विधानसभा क्षेत्र स्थित आवास पर पांच दिवसीय महाधरना भी शुरू किया जाएगा।
संघ ने बताया कि इसके बाद राजधानी रांची में पुराना विधानसभा से प्रोजेक्ट भवन तक पदयात्रा सह आक्रोश मार्च निकाला जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांगों के जल्द समाधान की अपील की जाएगी। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी सरकार ने सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभाग की होगी।
मनरेगा कर्मियों के इस आंदोलन का असर राज्य में ग्रामीण विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है। लंबे समय से जारी हड़ताल के कारण कई योजनाओं की निगरानी और संचालन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की आगामी रणनीति पर टिकी हुई हैं।
