Jharkhand News : राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, बच्चियों के ड्रॉपआउट को कम करने और शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विभाग को दिए गए कई महत्वपूर्ण निर्देश
Jharkhand News : शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए गए। राज्य में 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस खोलने, ड्रॉपआउट दर कम करने, शिक्षकों की संख्या बढ़ाने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
Jharkhand News : राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक में मौजूद अधिकारियों को शिक्षा क्षेत्र में सुधार, स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान यह बताया गया कि प्राथमिक शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में राज्य ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि शिक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। हालांकि सरकार का मानना है कि अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां और सुधार की आवश्यकता है।
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के बेहतर परिणाम पर संतोष
बैठक में इस वर्ष सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के बेहतर परीक्षा परिणामों पर संतोष व्यक्त किया गया। विशेष रूप से स्कूलों के शैक्षणिक स्तर में आए सुधार की सराहना की गई। हालांकि अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम को और बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सरकार का मानना है कि छात्रों को केवल परीक्षा तक सीमित शिक्षा देने के बजाय उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए अवसर प्रदान करना आवश्यक है। समीक्षा के दौरान यह भी कहा गया कि शिक्षा के अलावा अन्य विधाओं जैसे खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और तकनीकी शिक्षा में भी बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस शुरू करने की तैयारी
बैठक में विभाग को राज्य में 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस जल्द शुरू करने की दिशा में काम तेज करने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा जगुआर कैंपस में दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय को भी जल्द शुरू करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए। इससे दूर-दराज क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधाएं मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ड्रॉपआउट रेट कम करने पर विशेष जोर
बैठक के दौरान स्कूलों में छात्रों के रिटेंशन यानी उनकी निरंतर उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर को कम करने पर विशेष चर्चा हुई। खासकर बच्चियों की पढ़ाई बीच में छूटने की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऐसे कारणों की पहचान की जाए जिनकी वजह से छात्र-छात्राएं पढ़ाई छोड़ रहे हैं और उनके समाधान के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जाए। शिक्षा विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा आर्थिक, सामाजिक या अन्य कारणों से पढ़ाई से वंचित न रहे।
शिक्षकों की कमी दूर करने और नवाचार प्रशिक्षण पर जोर
बैठक में यह भी सामने आया कि कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या अपेक्षा से कम है। विशेष रूप से एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
साथ ही शिक्षकों को नई तकनीकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के लिए नवाचार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई। सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित और कुशल शिक्षक ही बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकते हैं।
शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों से रखने की योजना
बैठक में एक महत्वपूर्ण मुद्दा शिक्षकों पर बढ़ते प्रशासनिक कार्यभार का भी रहा। निर्देश दिया गया कि शिक्षकों को अनावश्यक प्रशासनिक दायित्वों से दूर रखा जाए ताकि वे पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकें।
शिक्षकों का अधिक समय प्रशासनिक कार्यों में लगने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में शिक्षा विभाग इस दिशा में नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है।
बच्चों को एक्सपोजर विजिट का मिलेगा अवसर
बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने के लिए एक्सपोजर विजिट कराने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत छात्रों को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिक केंद्रों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों का भ्रमण कराया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें नई चीजें सीखने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार की ओर से दिए गए इन निर्देशों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन किया गया तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती है।
