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CBSE 12th Result : 98.66 लाख कॉपियों की हुई डिजिटल जांच, ऑन स्क्रीन मार्किंग से बदली मूल्यांकन प्रक्रिया

CBSE 12th Result : सीबीएसई ने पहली बार बड़े स्तर पर लागू की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, छात्रों को मिला अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित रिजल्ट 

CBSE Board Result 2026 में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला। सीबीएसई ने कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा की 98.66 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डिजिटल ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से किया। बोर्ड के अनुसार, इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक निष्पक्ष बनी है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board of Secondary Education ने वर्ष 2026 की कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को बड़े स्तर पर लागू किया। सीबीएसई के मुताबिक, यह अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल मूल्यांकन अभियान रहा, जिसके तहत कुल 98,66,622 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई।

सीबीएसई का कहना है कि यह नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, छात्र-केंद्रित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बोर्ड का दावा है कि इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से छात्रों को अधिक निष्पक्ष और सटीक परिणाम मिले हैं।

क्या है ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली?

ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM एक डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया है, जिसमें परीक्षक उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कंप्यूटर स्क्रीन पर करते हैं। पहले की तरह कॉपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाता है और परीक्षक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मूल्यांकन करते हैं।

सीबीएसई के अनुसार, इस व्यवस्था से देश और विदेश में स्थित संबद्ध स्कूलों के शिक्षक कहीं से भी कॉपियों की जांच कर सकते हैं। इससे समय की बचत होने के साथ-साथ कॉपियों की सुरक्षा भी बेहतर हुई है।

ओएसएम प्रणाली से हुए बड़े फायदे

1. गोपनीयता और सुरक्षा में बढ़ोतरी

डिजिटल प्रणाली के कारण उत्तर पुस्तिकाओं को भौतिक रूप से भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे कॉपियों के खोने, बदलने या लीक होने जैसी आशंकाएं कम हो गई हैं। बोर्ड का कहना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बनी है।

2. अंकों की गलतियों में कमी

सीबीएसई ने बताया कि ऑन स्क्रीन मार्किंग से अंकों के जोड़, पोस्टिंग और अपलोडिंग में होने वाली मानवीय गलतियां लगभग खत्म हो गई हैं। इससे छात्रों को अधिक सटीक रिजल्ट मिला है।

3. हर उत्तर का सही मूल्यांकन

OSM प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक प्रश्न का मूल्यांकन निर्धारित मार्किंग स्कीम के अनुसार हो। इससे किसी उत्तर के छूटने या अधूरी जांच की संभावना काफी कम हो जाती है।

4. पारदर्शिता और निष्पक्षता

डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनी है। बोर्ड का मानना है कि इससे छात्रों और अभिभावकों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

5. शिक्षकों के समय और मेहनत की बचत

पहले शिक्षकों को कॉपियों के अंकों का जोड़ और डेटा अपलोड करने में काफी समय देना पड़ता था। अब यह प्रक्रिया स्वचालित हो गई है, जिससे शिक्षक मूल्यांकन की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं।

सीबीएसई ने इसे पर्यावरण के अनुकूल पहल बताया है। डिजिटल प्रक्रिया से पेपरलेस व्यवस्था को बढ़ावा मिला है और संसाधनों की बचत भी हो रही है।

सीबीएसई के अनुसार, देशभर के शिक्षकों ने ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का स्वागत किया है। कई शिक्षकों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें इस तकनीक को लेकर थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन प्रशिक्षण के बाद यह प्रक्रिया काफी आसान और उपयोगकर्ता अनुकूल साबित हुई।

शिक्षकों ने माना कि डिजिटल मूल्यांकन से अंकों की गणना और अपलोडिंग से जुड़ी त्रुटियां समाप्त हुई हैं। इससे छात्रों के प्रदर्शन का अधिक सटीक आकलन संभव हो पाया है।

कई परीक्षकों ने यह भी कहा कि ऑनलाइन प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनी है। इसके साथ ही पेपरलेस व्यवस्था को उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई की यह पहल आने वाले समय में देश की अन्य शिक्षा संस्थाओं के लिए भी मॉडल बन सकती है। डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से न केवल समय की बचत होगी बल्कि परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा ताकि छात्रों को तेज, सटीक और पारदर्शी परिणाम मिल सकें।

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