Jabalpur Cruise Accident : बरगी डैम में भीषण हादसा, 9 लोगों की मौत, 23 को बचाया गया – लापता लोगों की तलाश जारी
Jabalpur Cruise Accident : मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में 72 वर्षीय रियाज हुसैन ने चार घंटे तक मौत से लड़कर जिंदगी की जंग जीत ली, जबकि 9 लोगों की जान चली गई और कई अब भी लापता हैं।
Jabalpur Cruise Accident : मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा अब एक भयावह त्रासदी के रूप में सामने आया है। इस हादसे ने न सिर्फ कई परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे?
इस दर्दनाक हादसे के बीच 72 साल के रियाज हुसैन की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। मौत को सामने देखकर भी उन्होंने हार नहीं मानी और करीब चार घंटे तक पानी में फंसे रहकर जिंदगी की जंग जीत ली।
कैसे हुआ जबलपुर क्रूज हादसा?
गुरुवार शाम करीब 5 बजे पर्यटकों से भरा एक क्रूज नर्मदा नदी के बैकवाटर क्षेत्र में पहुंचा। तभी अचानक मौसम ने करवट ली। तेज हवाएं चलने लगीं और पानी में ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगीं।
देखते ही देखते क्रूज अनियंत्रित होकर डगमगाने लगा। कुछ ही मिनटों में अफरा-तफरी मच गई। यात्रियों में चीख-पुकार शुरू हो गई। कोई लाइफ जैकेट ढूंढ रहा था तो कोई अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर रहा था।
इसी बीच क्रूज में पानी भरना शुरू हो गया और कुछ ही देर में वह डूबने लगा।
“अब मैं भी डूब जाऊंगा…” – रियाज की दर्दनाक आपबीती
रियाज हुसैन अपने परिवार के साथ इस यात्रा पर निकले थे, लेकिन यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे खौफनाक अनुभव बन गया।
जब क्रूज डूबने लगा, तब रियाज ने खुद को संभाला और क्रूज के एक छोटे से हिस्से को पकड़ लिया, जो पानी से करीब दो फीट ऊपर था।
कुछ ही मिनटों में पानी उनकी गर्दन तक पहुंच गया। चारों तरफ अंधेरा, तेज लहरें और मौत का डर – यह सब कुछ उनके सामने था।
रियाज बताते हैं:
“मुझे लग रहा था अब सब खत्म हो गया है… सब डूब रहे हैं, अब मैं भी डूब जाऊंगा…”
इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ठंड से कांपते शरीर और कमजोर होती सांसों के बीच उन्होंने खुद को उसी जगह टिकाए रखा।
4 घंटे बाद ऐसे मिला जीवनदान
करीब चार घंटे तक मौत से जूझते रहने के बाद रियाज को बाहर से आवाजें सुनाई दीं। यह आवाजें उनके लिए उम्मीद की किरण बन गईं।
उन्होंने पूरी ताकत से क्रूज की दीवारों पर हाथ मारना शुरू किया। आवाज सुनकर रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची।
बचाव दल ने गैस कटर की मदद से क्रूज के ऊपरी हिस्से को काटा और आखिरकार रियाज को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था।
खुशी अधूरी: परिवार के सदस्य अब भी लापता
हालांकि रियाज की जान बच गई, लेकिन उनकी खुशी अधूरी है। हादसे के बाद से उनकी पत्नी और समधन अब भी लापता हैं।
एक तरफ जिंदगी बचने की राहत है, तो दूसरी तरफ अपनों की चिंता उन्हें अंदर से तोड़ रही है।
हादसे का आंकड़ा
- ⚫ 9 लोगों की मौत
- 🟢 23 लोगों को सुरक्षित बचाया गया
- 🔍 कई लोग अब भी लापता
- 🚑 रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। पुलिस, होमगार्ड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
इस हादसे के बाद सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगे हैं। क्या क्रूज में पर्याप्त लाइफ जैकेट थे? क्या मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया?
यह सवाल अब जांच का विषय बन चुके हैं।
जबलपुर का यह क्रूज हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह घटना बताती है कि जरा सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
रियाज हुसैन की कहानी हमें यह भी सिखाती है कि उम्मीद और हिम्मत के सहारे मौत को भी मात दी जा सकती है।
लेकिन जो लोग इस हादसे में अपने अपनों को खो चुके हैं, उनके लिए यह दर्द शायद कभी खत्म नहीं होगा।
