Jharkhand News: देवघर एम्स में लिफ्ट ऑपरेटर पद की बहाली प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े का मामला थाना पहुंच गया है। इस मामले में एम्स प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी ने देवीपुर थाने में काउंटर केस दर्ज कराया है। एम्स के कनीय प्रशासनिक पदाधिकारी सिद्धार्थ कुमार ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। मामला भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और जालसाजी से जुड़ा हुआ है। एम्स प्रबंधन का कहना है कि जांच में प्रथमदृष्टया कई तरह की गड़बड़ी और आपराधिक साजिश की जानकारी सामने आई है।
आउटसोर्सिंग कंपनी पर आरोप
आरोप है कि एम्स ने मेसर्स इंटेलिजेंस सिक्यूरिटी ऑफ इंडिया नामक कंपनी को लिफ्ट ऑपरेटर मुहैया कराने का काम दिया था। यह जिम्मेदारी उन्हें 21 जून 2024 को सौंपी गई थी। बताया गया है कि कंपनी ने एजेंट के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की। इन एजेंट्स ने नौकरी पाने के नाम पर अभ्यर्थियों से एक लाख रुपये तक की मांग की। जो उम्मीदवार पैसे नहीं देते थे, उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया ही नहीं जाता था। वहीं, पैसे देने वाले कम योग्यता वाले अभ्यर्थियों को मौका दे दिया जाता था।
एम्स की जांच और कार्रवाई की मांग
एम्स ने अपने स्तर पर जांच कर इस पूरे घोटाले की पुष्टि की। जांच में भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश की पुष्टि हुई। इसी आधार पर एम्स ने मामले की गहन जांच और कार्रवाई की मांग की है। एम्स के पदाधिकारी साकेत बिहारी और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। आरोप है कि उन्होंने अवैध रूप से धन लिया और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की। एम्स में भर्ती प्रक्रिया अधिकृत बहाली कमेटी द्वारा संचालित होती है और इसमें साकेत बिहारी प्रशासनिक पदाधिकारी के रूप में सदस्य हैं।
पुलिस छानबीन और भविष्य की कार्रवाई
अभ्यर्थियों की लिखित शिकायत में कहा गया कि साकेत बिहारी द्वारा अभ्यर्थियों से अवैध रूप से धन की मांग की गई और कुछ को पैसा देने पर भर्ती प्रक्रिया में अवसर दिया गया। इस कृत्य से एम्स की छवि और पारदर्शिता प्रभावित होती है। इसी आधार पर पुलिस मामले की गहन छानबीन कर रही है। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। मामले का सीधा असर भर्ती प्रक्रिया पर और एम्स की सार्वजनिक छवि पर पड़ सकता है।

