Jharkhand News: हाल ही में बजट सत्र के दौरान झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे के भाषण ने संसद में और बाहर भी तहलका मचा दिया। उनके द्वारा संदर्भित किताबों के कारण कई सवाल उठे और विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, ने उन पर कड़े आरोप लगाए। महिला सांसदों, नेहरू-इंदिरा गांधी और राहुल गांधी को लेकर विवादित टिप्पणियों के बाद माहौल गरमाया। इस बीच निशिकांत दुबे ने मीडिया से बातचीत में अपनी ओर से सफाई दी और स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में जो पढ़ा वह प्रकाशित सामग्री का ही हिस्सा था।
महिला सांसदों और विपक्ष पर निशिकांत दुबे का तंज
सांसद दुबे ने महिला सांसदों और विपक्षी दलों के उनके खिलाफ उठाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष उनसे डरता है और संसद में जब वे खड़े होते हैं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है। इंडिया टीवी के कार्यक्रम ‘आप की अदालत’ में उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी जी जहां भी होंगी, सुनने आ जाएंगी। दुबे ने जोर देकर कहा कि उन्हें किसी से डर नहीं है क्योंकि उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उनके अनुसार उनका उद्देश्य केवल सच्चाई और तथ्यों को सामने लाना है।
नेहरू और इंदिरा गांधी पर उठे विवाद पर सफाई
पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर ‘अय्याश’ कहे जाने के आरोपों पर दुबे ने स्पष्ट किया कि यह शब्द उन्होंने अपनी ओर से नहीं जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह वाक्य एक किताब में लिखा हुआ है और उन्होंने वही संसद में पढ़ा। इंदिरा गांधी और एमओ मथाई को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने बताया कि एमओ मथाई ने अपनी किताब में जो तथ्य प्रस्तुत किए, वही उन्होंने सदन में पढ़े। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने कुछ भी जोड़-घटाव नहीं किया। उनका कहना था कि पढ़ाई और रिसर्च के कारण ही वे ऐसी सामग्री तक पहुंच बनाते हैं।
राहुल गांधी पर तंज और अपनी पढ़ाई का हवाला
राहुल गांधी को किताब न पढ़ने देने के आरोपों पर निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने उन्हें एक्सपोज होने से बचाया। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी को बिना टोके बोलने दिया जाए तो वे पांच मिनट भी प्रभावी ढंग से नहीं बोल पाएंगे। दुबे ने आगे कहा कि राहुल गांधी खाली किताब और संविधान लेकर आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे रोज दो घंटे पढ़ाई और रिसर्च करते हैं और जो तथ्य सही लगते हैं, वही सदन में रखते हैं। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में फिर से चर्चा का विषय बन गया है।

