Jharkhand News: आज देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। झारखंड के देवघर स्थित ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पवित्र चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह उत्सव के लिए भक्तों ने जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और रुद्राभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
भव्य शिव बारात का आयोजन, रात में निकलेगा अनोखा उत्सव
मंदिर के पुजारी ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती के शुभ विवाह का पर्व मनाया जाता है। रात्रि में भव्य झांकी और शिव बारात निकाली जाती है जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। बारात में ढोल-नगाड़े, घोड़ा, नागिन नृत्य और पारंपरिक झांकियां मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। भक्त भूत-बेताल स्वरूप में सजकर इस भव्य बारात में शामिल हुए। पुजारी ने कहा कि बाबा बैद्यनाथ मनोकामना लिंग के रूप में प्रसिद्ध हैं और यहां सच्चे मन से आए भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
Deoghar, Jharkhand: On the occasion of Mahashivratri, a priest says, "Today marks the sacred day of Mahashivratri, which coincides with the 13th day of Chaturdashi. Devotees celebrate the auspicious wedding of Baba Baidyanath and Mata Parvati. During the night, a grand procession… pic.twitter.com/zC49mV28R2
— IANS (@ians_india) February 15, 2026
ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ के रूप में बाबा बैद्यनाथ का महत्व
पुजारी ने आईएएनएस को बताया कि देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम केवल एक ज्योतिर्लिंग ही नहीं, बल्कि शक्तिपीठ भी माना जाता है। यहां माता पार्वती शक्ति स्वरूप में विराजमान हैं, जिससे भक्तों को शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि देशभर से श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और आशीर्वाद पाने के लिए यहां आते हैं। मंदिर की पवित्रता और दिव्यता इसे विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करती है।
बेलपत्र अर्पण का महत्व और श्रद्धालुओं की आस्था
पुजारी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि तीन पत्तों वाला बेलपत्र शिव को चढ़ाने से जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। भक्तों का विश्वास है कि बाबा बैद्यनाथ ब्रह्मांड के राजा हैं और समस्त विश्व की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। इस आस्था के कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव से देवघर पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना में सम्मिलित होते हैं। महाशिवरात्रि का यह पर्व भक्तों के लिए अध्यात्मिक आनंद और मनोकामना पूर्ण करने वाला होता है।

