Jharkhand के रांची स्थित राज्य आदिवासी सहकारी सब्जी विपणन महासंघ लिमिटेड (VEGFED) के पूर्व प्रबंध निदेशक जयदेव प्रसाद सिंह पर भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने प्रारंभिक जांच में साक्ष्यों के आधार पर यह पुष्टि की है कि जयदेव प्रसाद सिंह ने अपनी पद की आड़ में सरकारी धन का करोड़ों रुपए का गबन किया। इस गबन के मामले में एसीबी ने 29 जनवरी 2026 को लोकायुक्त से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी।
जांच में पता चला कि जयदेव प्रसाद सिंह ने अप्रैल 2017 से जुलाई 2018 के बीच VEGFED के साथ जुड़ी कई योजनाओं में करोड़ों रुपए का गबन किया। विशेष रूप से 2013 में नागरी, रांची में चल रही नैचुरली वेंटिलेटेड पॉली हाउस योजना में पहले से एक एफआईआर दर्ज थी। इसके बावजूद सिंह ने उस योजना का ठेका उसी ठेकेदार को पुनः दे दिया, जिससे पहले भी 60 लाख रुपए भुगतान हो चुके थे। इसके बाद सिंह ने अवैध तरीके से 1.48 करोड़ रुपए अतिरिक्त भुगतान किए, जबकि नियमों के मुताबिक ठेकेदार को केवल खर्च के बिल प्रस्तुत करने पर ही भुगतान किया जाना था।
जांच से यह भी पता चला कि जयदेव प्रसाद सिंह ने अपने अधिकारों का उल्लंघन करते हुए 20 लाख, 25 लाख और 10 लाख रुपए के अग्रिम भुगतान किए। जबकि उनकी मंजूरी अधिकतम पांच लाख रुपए तक ही थी। यह स्पष्ट संकेत है कि सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग कर ठेकेदार से अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए साजिश रची। यह वित्तीय अनियमितता सरकार को भारी नुकसान पहुंचाने वाली साबित हुई है।
झारखंड में लोकायुक्त का पद जून 2021 से खाली है। इस रिक्तता के कारण एंटी करप्शन ब्यूरो की दर्जनों अनुशंसाएं लंबित हैं। इनमें से कई फाइलें जांच की स्थिति अपडेट करने से जुड़ी हैं और कुछ मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए लोकायुक्त की अनुमति चाहिए। लोकायुक्त के न होने के कारण इन मामलों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ मामले लटकते जा रहे हैं।

