Jharkhand News: जब प्रदूषण की बात होती है तो अक्सर दिल्ली का स्मॉग से भरा चेहरा दिमाग में आता है। लेकिन क्या झारखंड के औद्योगिक केंद्र जमशेदपुर की हवा वाकई सुरक्षित है? हाल के आंकड़ों और विशेषज्ञों की राय को देखने पर यह पता चलता है कि स्थिति चिंताजनक दिशा में बढ़ रही है। दिल्ली जहाँ कड़ाके की सर्दियों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400-500 के पार पहुंचकर खतरनाक श्रेणी में आ जाती है, वहीं जमशेदपुर सामान्य दिनों में 120 से 180 के बीच रहकर मध्यम स्तर पर बना रहता है। हालांकि, औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों के कारण शहर के कुछ इलाकों जैसे सकची और बिस्तुपुर में यह 250 तक भी पहुंच जाता है। वर्तमान में जमशेदपुर का AQI लगभग 200 के आस-पास है, जो स्वास्थ्य के लिए अस्वस्थ माना जाता है।
जमशेदपुर का भौगोलिक लाभ यह है कि यहाँ हरियाली दिल्ली की तुलना में अधिक है, जो कार्बन अवशोषण में मदद करती है। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों में PM 2.5 और PM 10 की मात्रा में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि जमशेदपुर भी दिल्ली के समान प्रदूषण के रास्ते पर बढ़ रहा है। AQI के विभिन्न स्तरों के अनुसार, 0-50 ‘अच्छा’, 51-100 ‘संतोषजनक’, 101-200 ‘मध्यम’, 201-300 ‘खराब’, 301-400 ‘बहुत खराब’ और 401-500 ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। जब AQI 300 से ऊपर होता है, तब प्रशासन को स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करना पड़ता है और निर्माण कार्यों को रोकना होता है। 400 से ऊपर होने पर स्कूलों को बंद करना और कड़े नियम लागू करना अनिवार्य हो जाता है।
जमशेदपुर में वाहनों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है, जो वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रही है। लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि प्रदूषण जांच नाम मात्र की होती है। जांच पोस्ट पर कर्मी केवल कागजी कार्यवाही देखते हैं और वाहनों को जाने देते हैं, जबकि सड़क पर तैनात पुलिसकर्मी तकनीकी रूप से वाहन उत्सर्जन की जांच नहीं कर रहे हैं। सिर्फ कागज देखकर प्रदूषण कम नहीं होगा, बल्कि जमीन पर सख्त तकनीकी मानकों को लागू करना जरूरी है। इसके साथ ही स्वर्णरेखा और खरकई नदियाँ, जो शहर की जीवन रेखा मानी जाती हैं, कूड़े और औद्योगिक कचरे का शिकार हो रही हैं। नागरिकों को नदी संरक्षण के महत्व से अवगत कराना आवश्यक है ताकि वे नदियों में कचरा डालने से बचें।
सरकार और प्रशासन को केवल योजनाएं बनाकर काम नहीं चलाना चाहिए, बल्कि बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग बनाना होगा। साथ ही उद्योगों पर भी सख्त निगरानी रखनी होगी ताकि वे पर्यावरण मानकों का पालन करें। जमशेदपुर को एक बार फिर से साफ और हरियाली से भरपूर शहर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों के स्वास्थ्य पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ रहे हैं। इसलिए समय रहते उचित नीतियाँ बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है, अन्यथा यह शहर भी दिल्ली जैसी घातक प्रदूषण समस्या से जूझेगा।

