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RanchiEducationJharkhand News Desk

रांची यूनिवर्सिटी में PhD एडमिशन के लिए इंटरव्यू 22 से 24 अक्टूबर तक होंगे; सिलेक्शन प्रोसेस में NET/GATE स्कोर को 70% वेटेज दिया जाएगा।

रांची यूनिवर्सिटी में PhD एडमिशन के लिए इंटरव्यू 22 से 24 अक्टूबर तक होंगे; सिलेक्शन प्रोसेस में NET/GATE स्कोर को 70% वेटेज दिया जाएगा।

रांचीः जिला के रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं. कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और शोध निदेशालय के सदस्यों की बैठक हुई. इसमें तय किया गया कि पीएचडी प्रवेश के लिए साक्षात्कार 22, 23 और 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित किए जाएंगे. अंतिम चयन में नेट-गेट स्कोर को 70 प्रतिशत और साक्षात्कार के अंकों को 30 प्रतिशत भारांक दिया जाएगा.

वहीं, 10 सितंबर 2026 के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा. बैठक में शोध प्रवेश, अभ्यर्थियों के चयन, साक्षात्कार की प्रक्रिया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े कई निर्णय लिए गए. विश्वविद्यालय के अनुसार, चयन सूची नेट-जेआरएफ, नेट-एलएस, नेट-पीएचडी प्रवेश, गेट और एमफिल श्रेणी के अभ्यर्थियों तक सीमित रहेगी. शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के दिन अपना नेट या गेट स्कोरकार्ड जमा करना होगा.

चार सदस्यीय बोर्ड करेगा साक्षात्कार

पीएचडी प्रवेश के लिए गठित साक्षात्कार बोर्ड में डीआरसी अध्यक्ष, कुलपति द्वारा मनोनीत विषय विशेषज्ञ, शोध निदेशालय द्वारा मनोनीत एक सदस्य और विभागीय पीएचडी समन्वयक या संयोजक शामिल होंगे. कुलपति और शोध निदेशालय की ओर से मनोनीत सदस्यों के नियुक्ति पत्र तैयार किए जा रहे हैं.

विश्वविद्यालय ने यह भी निर्णय लिया है कि जिन अभ्यर्थियों की नेट-एलएस या नेट-पीएचडी की वैधता एक जुलाई से 30 सितंबर 2026 के बीच समाप्त हुई है, उनके मामलों पर प्रक्रियात्मक देरी के कारण वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विचार किया जाएगा. वर्ष 2018 से पहले नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के स्कोरकार्ड पर अंक प्रतिशत दर्ज नहीं होने की स्थिति में अंतिम चयन के लिए साक्षात्कार में प्राप्त अंकों का प्रतिशत मान्य होगा.

पुराने पीएचडी मामलों पर अलग से विचार

बैठक में लंबित पीएचडी मामलों पर भी चर्चा हुई. जिन अभ्यर्थियों ने सारांश जमा करने, पूर्व-पंजीकरण सेमिनार और पाठ्यक्रम कार्य जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं तथा जिनके नाम विभागाध्यक्षों की ओर से भेजे गए हैं, उनके मामलों पर पीएचडी विनियमन 2009 के तहत अलग से विचार किया जाएगा. वहीं, डी.लिट. और डी.एससी. से जुड़े मामलों का निस्तारण नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अधिसूचित होने तक स्थगित रहेगा.

शोध कार्यों में साहित्यिक चोरी की होगी जांच

शैक्षणिक और शोध कार्यों में साहित्यिक चोरी की जांच के लिए विश्वविद्यालय के विभागों में टर्निटिन सॉफ्टवेयर की सदस्यता लेने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा सभी विभागों को आधिकारिक पत्राचार के लिए संस्थागत ई-मेल आईडी का अनिवार्य रूप से उपयोग करने का निर्देश दिया गया है. वर्तमान में उपलब्ध 70 ई-मेल आईडी के अतिरिक्त पांच वर्ष की सदस्यता अवधि के लिए 200 नई ई-मेल आईडी खरीदी जाएंगी.

साक्षात्कार में पारदर्शिता पर जोर

बैठक में साक्षात्कार प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए भी व्यवस्था तय की गई. अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा. आवश्यकतानुसार डीआरसी विश्वविद्यालय विभाग के संयोजक को अधिसूचित करेगा। प्रत्येक पैनल सदस्य को अभ्यर्थियों के स्कोरकार्ड की छायाप्रति दी जाएगी और वे स्वतंत्र रूप से हस्ताक्षर के साथ अंक देंगे. सभी सदस्यों के अंकों का औसत निकालकर हस्ताक्षर सहित अंतिम स्कोरकार्ड तैयार किया जाएगा. इसके साथ ही, जहां आवश्यक होगा, वहां बायोमेट्रिक उपस्थिति की सुविधा की मरम्मत या नई व्यवस्था की जाएगी.

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