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GarhwaAdministrationJharkhand News Desk

नगर परिषद के नोटिस पर विवाद, गढ़वा में मांस और मछली की दुकानें 9 दिनों तक बंद रहेंगी।

नगर परिषद के नोटिस पर विवाद, गढ़वा में मांस और मछली की दुकानें 9 दिनों तक बंद रहेंगी।

गढ़वा: जिला में नवरात्रि के दौरान मांस, मुर्गा और मछली की दुकानों को बंद रखने के निर्देश पर अब विवाद खड़ा हो गया है. नगर परिषद की ओर से जारी नोटिस के बाद शहर में पक्ष और विपक्ष के बीच आवाजें उठने लगी हैं.

एक ओर एक पक्ष इस फैसले का समर्थन कर रहा है जबकि दूसरे पक्ष के कुछ लोग इसे लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं. अब यह मामला आस्था, खान-पान की स्वतंत्रता और प्रशासनिक फैसले के बीच बहस का मुद्दा बन गया है.

गढ़वा में बयानबाजी शुरू

इस नोटिस के जारी होने के बाद गढ़वा में राजनीति बयानबाजी भी शुरू हो गई है. दरअसल, शारदीय नवरात्रि के मद्देनजर गढ़वा नगर परिषद ने मटन, चिकन और मछली के दुकानदारों को दुकानें बंद रखने का निर्देश जारी किया है।

मांसाहारी दुकानों को बंद रखने की हुई थी मांग

गढ़वा शहर में नवरात्रि के दौरान जगह-जगह पूजा पंडाल बनाए जाते हैं. इनमें से कई पंडाल मुख्य सड़कों और बाजारों के आसपास स्थित होते हैं. स्थानीय लोगों और पूजा समितियों की ओर से इन इलाकों में मांसाहारी दुकानों को बंद रखने की मांग की गई थी।

हमारे त्योहार पर विरोध क्यों: आशीष सोनी

बताया जा रहा है कि आवेदन और सोशल मीडिया के माध्यम से भी नगर परिषद से इस संबंध में आग्रह किया गया था. इसके बाद नगर परिषद अध्यक्ष के निर्देश पर दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया. इस फैसले के समर्थन में नगर परिषद अध्यक्ष आशीष सोनी उर्फ दौलत सोनी का कहना है कि विशेष धर्म के लोगों ने अपने पर्व को लेकर मांग की थी, जिसे नगर परिषद ने लागू किया है. उनका सवाल है कि जब दूसरे समुदायों के त्योहारों पर कोई आपत्ति नहीं की जाती है, तो उनके त्योहार के दौरान ऐसी मांग पर विरोध क्यों हो रहा है?

मंदिर और स्कूलों के आसपास शराब की दुकान क्यों: मासूम खान

वहीं, नगर परिषद के इस फैसले पर स्थानीय नेता मासूम खान ने कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि दूसरा शख्स कब और क्या खाएगा. उन्होंने इस फैसले को अनुचित बताते हुए शहर में शराब दुकानों के आसपास मंदिरों और सरकारी विद्यालयों की मौजूदगी का मुद्दा भी उठाया है।

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