Tata Steel प्रबंधन ने साल के अंत में अपने अधिकारियों की भूमिकाओं में बड़े और अहम बदलाव किए हैं। कंपनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर टी. वी. नरेंद्रन ने बुधवार को दो महत्वपूर्ण आदेश जारी किए, जिनके तहत जमशेदपुर और कलिंगानगर प्लांट के हॉट स्ट्रिप मिल (HSM) प्रमुखों की अदला-बदली की गई है। यह फैसला कंपनी की दो सबसे महत्वपूर्ण उत्पादन इकाइयों—जमशेदपुर वर्क्स और कलिंगानगर—की परिचालन दक्षता को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विभाग में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अधिकारी को प्रमोशन देकर प्रबंधन ने तकनीकी नवाचार पर अपना भरोसा भी जाहिर किया है।
प्रबंधन के आदेश के अनुसार, यह बदलाव 15 फरवरी से प्रभावी होंगे। इसके तहत पीएसएस गणेश, जो अब तक टाटा स्टील जमशेदपुर में हॉट स्ट्रिप मिल के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे, उन्हें कलिंगानगर स्थानांतरित किया गया है। वे अब टाटा स्टील कलिंगानगर में उसी पद और उसी स्तर (IL-2) पर अपनी सेवाएं देंगे। नई व्यवस्था के तहत गणेश जाजपुर से काम करेंगे और कलिंगानगर ऑपरेशंस के वाइस प्रेसिडेंट को रिपोर्ट करेंगे। माना जा रहा है कि गणेश के अनुभव का लाभ कलिंगानगर प्लांट की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता सुधार में मिलेगा।
इसी क्रम में, तुहिन चटर्जी, जो अब तक कलिंगानगर में हॉट स्ट्रिप मिल के प्रमुख थे, को वापस जमशेदपुर भेजा गया है। अब वे टाटा स्टील जमशेदपुर में हॉट स्ट्रिप मिल के चीफ के रूप में अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे। तुहिन जमशेदपुर से काम करेंगे और चीफ ऑफ फ्लैट प्रोडक्ट्स (मैन्युफैक्चरिंग) को रिपोर्ट करेंगे। खास बात यह है कि दोनों अधिकारियों के पद और ग्रेड में कोई बदलाव नहीं किया गया है, केवल उनके कार्यस्थल बदले गए हैं। प्रबंधन का मानना है कि इस तरह की रोटेशनल पोस्टिंग से नेतृत्व कौशल में विविधता आती है और विभिन्न यूनिट्स को अनुभवी नेतृत्व का लाभ मिलता है।
इन स्थानांतरणों के साथ-साथ Tata Steel ने तकनीक के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी के चीफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑफिसर सौम्य बोस को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और सिफारिशों के आधार पर प्रमोट किया गया है। सौम्य बोस को इसी साल 1 जुलाई को IL-3 स्तर पर नियुक्त किया गया था। मात्र छह महीने के भीतर ही प्रबंधन ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें 1 जनवरी से IL-2 स्तर पर पदोन्नत कर दिया है। उनकी नई भूमिका की खास बात यह है कि वे “वर्क फ्रॉम एनीवेयर” मॉडल के तहत कहीं से भी काम कर सकेंगे। हालांकि, पहले की तरह वे चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर को ही रिपोर्ट करते रहेंगे। यह फैसला दर्शाता है कि टाटा स्टील न केवल पारंपरिक उत्पादन इकाइयों में, बल्कि डिजिटल और AI आधारित नवाचारों में भी भविष्य की तैयारी कर रही है।

