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Jharkhand News: रांची में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स चयन ट्रायल, हजारों आदिवासी खिलाड़ियों का जलवा

Jharkhand News: झारखंड की मिट्टी हमेशा से खेल और खिलाड़ियों के लिए उर्वर रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजधानी रांची में आगामी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए राज्य स्तरीय चयन ट्रायल का सफल आयोजन किया गया। यह खेल आयोजन 14 फरवरी से छत्तीसगढ़ में होने जा रहा है। राज्य के कोने कोने से हजारों आदिवासी युवा अपने सपनों को आंखों में लेकर ट्रायल में पहुंचे। स्टेडियमों में जोश उत्साह और आत्मविश्वास का अनोखा संगम देखने को मिला। यह सिर्फ खेलों की प्रतिस्पर्धा नहीं थी बल्कि गांव जंगल और दूरदराज के इलाकों से आए उन युवाओं की कहानी थी जो सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।

इस चयन प्रक्रिया में सात प्रमुख खेलों पर ध्यान केंद्रित किया गया जिनमें हॉकी फुटबॉल एथलेटिक्स तैराकी तीरंदाजी कुश्ती और वेटलिफ्टिंग शामिल रहे। मोरहाबादी के फुटबॉल स्टेडियम में खासा उत्साह देखने को मिला जहां करीब 280 युवक और 80 युवतियों ने मैदान में अपना पसीना बहाया। कोचों के अनुसार फुटबॉल में 30 30 खिलाड़ियों को शुरुआती कैंप के लिए चुना गया है जिनमें से अंतिम रूप से 22 खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। एथलेटिक्स में 200 से अधिक खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ और 70 खिलाड़ियों ने अगले दौर में जगह बनाई। हॉकी के पुरुष और महिला वर्ग में भी जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। हर खिलाड़ी की आंखों में आगे बढ़ने का सपना साफ झलक रहा था।

ट्रायल में शामिल खिलाड़ियों की कहानियां संघर्ष और जज्बे से भरी हुई हैं। एथलेटिक्स में चयनित रामचंद्र संगा ने भावुक होकर बताया कि उनके माता पिता खेती कर किसी तरह उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण का खर्च उठा रहे हैं। जब उन्होंने चयन की खबर घर पहुंचाई तो पूरे परिवार की आंखें खुशी से भर आईं। एथलीट आशा किरण बरला का चयन इस बात का सबूत है कि झारखंड की बेटियां भी देश और दुनिया में तिरंगा लहराने को तैयार हैं। फुटबॉल में चुने गए बिरसा विनीत कुजूर के लिए यह सफलता पांच साल की मेहनत और कई असफलताओं के बाद मिली नई उम्मीद है। विनीत का सपना है कि वह झारखंड का नाम रोशन करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनें।

गुमला की 16 वर्षीय बीना मुंडा के लिए फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं बल्कि उनके पिता का सपना है। कच्चे घर में रहने वाली बीना को हर सुबह पिता दौड़ के लिए जगाते थे। चयन होने पर बीना ने अपनी सफलता पिता को समर्पित की। खूंटी की हॉकी खिलाड़ी बालू होरो की कहानी भी प्रेरणादायक है। बचपन में पिता को खोने के बाद मां ने खेती कर चार बच्चों को पाला और बालू को खेलने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। इसी तरह 19 वर्षीय निशा मिंज ने आर्थिक तंगी और पिता की गैर मौजूदगी के बावजूद हॉकी में पांच साल मेहनत कर चयनकर्ताओं का दिल जीत लिया। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स युवा कार्य और खेल मंत्रालय की एक अनोखी पहल है जिसका उद्देश्य दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों की छिपी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देना है। यह आयोजन खेलों के साथ साथ आदिवासी संस्कृति गौरव और समान अवसर का भी उत्सव है। चयनित खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग पोषण और आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं ताकि वे भविष्य में ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंचों के लिए तैयार हो सकें।

Neha Yadav
Neha Yadavhttp://jharkhandnews.com
नेहा यादव पिछले पाँच वर्षों से एक प्रतिभाशाली और समर्पित न्यूज़ आर्टिकल राइटर के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से शोध कर, समाचारों को सटीक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अपना अनूठा अंदाज विकसित किया है। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और आकर्षक है जिससे पाठकों को जानकारी समझने में आसानी होती है। नेहा हर दिन नवीनतम घटनाओं और विषयों पर अपडेट रहती हैं और उन्हें व्यापक दृष्टिकोण से दर्शाने का प्रयास करती हैं। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें न्यूज़ वेबसाइट पर विश्वसनीय और सम्मानित लेखक बना दिया है। वे लगातार समाज के मुद्दों को उजागर करने और जागरूकता फैलाने में योगदान दे रही हैं।
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