Jharkhand में वर्ष 2026 के नगर निकाय चुनावों की बिगुल बज चुकी है। जो लोग पार्षद, अध्यक्ष या मेयर बनने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह समय बेहद अहम है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव से पहले नियमों को और सख्त कर दिया है। अब चुनाव लड़ने के लिए न सिर्फ योग्यता बल्कि कई कानूनी शर्तों को भी पूरा करना अनिवार्य होगा। ताजा अधिसूचनाओं के अनुसार उम्मीदवारों के लिए अधिकतम चुनाव खर्च की सीमा 15 लाख रुपये तय कर दी गई है। इसके साथ ही आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वालों के लिए वैध जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। यह पूरी व्यवस्था झारखंड नगर पालिका अधिनियम 2011 और हालिया दिशा निर्देशों पर आधारित है।
नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार का नाम संबंधित नगर निकाय की मतदाता सूची में होना जरूरी है। न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय की गई है और उम्मीदवार को भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिला आरक्षित सीटों पर वही उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है जो उसी श्रेणी से आता हो। इसके साथ ही दो से अधिक जीवित संतान होने पर अयोग्यता का प्रावधान लागू है। नगर निगम या नगर परिषद का बकाया टैक्स जमा नहीं होने की स्थिति में भी चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी। गंभीर आपराधिक मामलों में सजा पाए व्यक्ति, सरकारी नौकरी में कार्यरत कर्मचारी या मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति भी चुनाव से बाहर रहेंगे। यदि कोई व्यक्ति विधायक, सांसद या पंचायत प्रतिनिधि है, तो उसे एक पद छोड़ना अनिवार्य होगा।
नामांकन प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित तारीखों पर होगी। उम्मीदवार को नामांकन पत्र के साथ शपथ पत्र देना होगा जिसमें संपत्ति, देनदारी, शिक्षा और आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है। गलत जानकारी देने पर जेल या जुर्माने का प्रावधान है। आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए वैध जाति प्रमाण पत्र जरूरी होगा, जो सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया हो। पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र भी अनिवार्य होगा। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी प्रमाण पत्र मिलने पर न सिर्फ नामांकन रद्द होगा बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। आरक्षण व्यवस्था आबादी के आधार पर तय होती है और हर दस साल में इसका पुनरीक्षण और रोटेशन किया जाता है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव खर्च की निगरानी को और कड़ा कर दिया है। उम्मीदवार को नामांकन से लेकर परिणाम घोषित होने तक खर्च का पूरा हिसाब रखना होगा। निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करने पर अयोग्यता तय है। मतदान प्रक्रिया प्रत्यक्ष होगी और मतदाताओं को पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। मतदान के दिन सार्वजनिक अवकाश रहेगा और मतदान से 48 घंटे पहले शराबबंदी लागू होगी। चुनाव जीतने के बाद पार्षद और अध्यक्ष को संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी होगी। समय पर शपथ न लेने पर पद रिक्त हो सकता है। नगर निकाय का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और विशेष परिस्थितियों में जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का प्रावधान भी कानून में शामिल है। झारखंड नगर निकाय चुनाव 2026 न सिर्फ लोकतंत्र की परीक्षा होंगे बल्कि उम्मीदवारों की जिम्मेदारी और पारदर्शिता की भी कसौटी साबित होंगे।

