Jharkhand की राजधानी रांची के चान्हो थाना क्षेत्र में शनिवार की मध्यरात्रि को हुए हाथियों के हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस दर्दनाक घटना में 40 वर्षीय छोटन मुंडा की मौत हो गई। वह होना गांव के निवासी थे और उसी गांव के पास हाथियों के अचानक पहुंचने के वक्त किसी काम से बाहर निकले थे। अचानक हाथियों ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही ने बढ़ाई चिंता
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की ओर से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते न तो किसी प्रकार की रोकथाम की गई है और न ही लोगों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम किए गए हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग की लापरवाही को मृतक की मौत का मुख्य कारण बताया है। ऐसे में हाथियों की बढ़ती उपस्थिति से स्थानीय लोगों में खौफ और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।

ग्रामीणों ने किया सड़क जाम कर प्रदर्शन
घटना की खबर मिलते ही रविवार की सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण रांची-डाल्टेनगंज राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-39) पर इकट्ठा हो गए। उन्होंने सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे करीब तीन घंटे तक यातायात बाधित रहा। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग की नाकामी पर कड़ी आपत्ति जताई और मृतक के परिवार के लिए मुआवजे की मांग की। साथ ही एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और गांव में हाथियों से सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम करने की भी जोरदार मांग उठाई।
वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने दिया आश्वासन
प्रदर्शन शुरू होने के बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश की। अधिकारियों ने भरोसा दिया कि मामले की गंभीरता को समझते हुए पूरी जांच की जाएगी। साथ ही पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि हाथियों की आवाजाही पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ग्रामीणों की चेतावनी है कि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
स्थानीय लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए
यह घटना एक बार फिर वन्यजीव और मानव संघर्ष की सच्चाई को उजागर करती है। हाथी जैसे विशाल और शक्तिशाली जीवों की बढ़ती संख्या और मानव आवास के निकट उनकी आवाजाही भविष्य में और भी गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है। इसलिए वन विभाग और सरकार को चाहिए कि वे प्रभावी और स्थायी उपाय करें ताकि ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा हो सके। साथ ही लोगों को वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की शिक्षा और जागरूकता भी बढ़ानी होगी।

