West Singhbhum : कुमारडुंगी प्रखंड में पीसीसी सड़क निर्माण पर उठे सवाल, काम पूरा होने से पहले ही सड़क में दिखने लगीं दरारें
West Singhbhum के कुमारडुंगी प्रखंड में डीएमएफटी मद से बन रही डेढ़ करोड़ की पीसीसी सड़क निर्माण योजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए काम रोक दिया। सड़क पूरी बनने से पहले ही उसमें दरारें आने लगी हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
पश्चिम सिंहभूम जिला के कुमारडुंगी प्रखंड क्षेत्र में डीएमएफटी मद से चल रहे सड़क निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बन रही पीसीसी सड़क में घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने शुक्रवार को सड़क निर्माण कार्य रोक दिया और ठेकेदार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
मामला गांडकिदा गांव का है, जहां पुतकरसाई मुख्य सड़क से बालिदस्कन चौक तक करीब दो किलोमीटर लंबी पीसीसी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण का कार्य बेहद घटिया तरीके से कराया जा रहा है। सड़क अभी पूरी तरह बनकर तैयार भी नहीं हुई है, लेकिन उसमें जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क निर्माण का जिम्मा मझगांव प्रखंड के खड़पोस गांव निवासी इमरान नामक ठेकेदार को मिला है। आरोप है कि ठेकेदार खुद मौके पर नहीं आता और अपने भाइयों के माध्यम से काम करवा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क की स्थिति देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सड़क एक वर्ष भी नहीं टिक पाएगी। अभी से सड़क में फटी हुई दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिससे भविष्य में इसके पूरी तरह जर्जर होने की आशंका बढ़ गई है।
गांव के लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार ठेकेदार से इस संबंध में शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार ने पांच वर्ष तक मरम्मत की जिम्मेदारी होने की बात कहकर मामले को दबाने की कोशिश की।
इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग के जेई जांच के नाम पर कार्य स्थल पहुंचे जरूर थे, लेकिन उन्होंने सड़क का सही तरीके से निरीक्षण नहीं किया। गांव वालों का कहना है कि अधिकारी केवल अच्छी जगहों की जीपीएस फोटो लेकर वापस लौट गए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब वे घटिया निर्माण की शिकायत लेकर अधिकारियों के पास पहुंचना चाहते थे, उससे पहले ही अधिकारी वहां से निकल चुके थे। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में डीएमएफटी मद से चल रहे कई निर्माण कार्यों में इसी तरह की लापरवाही देखने को मिल रही है। ठेकेदार अपनी मनमानी तरीके से काम कर रहे हैं और उन पर किसी प्रकार की निगरानी नहीं है। ना तो प्रशासन इस दिशा में गंभीर नजर आ रहा है और ना ही जनप्रतिनिधि कोई पहल कर रहे हैं।
सड़क निर्माण में काम कर रहे मजदूरों ने भी ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि उनसे सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार काम कराया जा रहा है, लेकिन मजदूरी के नाम पर केवल 350 रुपये ही दिए जा रहे हैं। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार पूरी मजदूरी भी समय पर नहीं दी जाती।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो। साथ ही दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक सड़क निर्माण कार्य सही गुणवत्ता के साथ दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा, तब तक वे काम नहीं होने देंगे। गांव वालों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक सही तरीके से पहुंचे, इसके लिए पारदर्शिता और निगरानी बेहद जरूरी है।
यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही टूटने लगे, तो इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
