Women’s Empowerment in Jharkhand : महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग में नई नियुक्तियों से योजनाओं के क्रियान्वयन को मिलेगी रफ्तार
Women’s Empowerment in Jharkhand : झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और 237 महिला पर्यवेक्षिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिससे राज्य में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति अभियान को नई मजबूती मिलेगी।
झारखंड सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत नव-नियुक्त 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और 237 महिला पर्यवेक्षिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। यह कार्यक्रम झारखंड मंत्रालय में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में अधिकारी, अभ्यर्थी और उनके परिजन उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि लंबे समय बाद इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियां होना राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और अब सरकारी तंत्र का हिस्सा बनकर वे राज्य के विकास में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी नवनियुक्त कर्मी अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ निभाएंगे।

महिला सशक्तिकरण और विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि झारखंड को एक स्वस्थ, सशक्त और विकसित राज्य बनाने में महिलाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ नियुक्ति देना नहीं, बल्कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित एक मजबूत व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि नियमित और अनुबंध आधारित नियुक्तियों के जरिए सरकार विभिन्न वर्गों में रोजगार सृजन कर रही है, जिससे विकास कार्यों को गति मिल रही है।
कुपोषण मुक्त झारखंड का लक्ष्य
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुपोषण को राज्य की एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। उन्होंने सभी नवनियुक्त कर्मियों से आह्वान किया कि वे इस गंभीर समस्या को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लें।
उन्होंने कहा कि कुपोषण समाज के लिए एक अभिशाप है और अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा बन सकता है। झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कई बार महिलाएं अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को साझा नहीं करतीं, जिससे छोटी समस्याएं भी गंभीर रूप ले लेती हैं। ऐसे में महिला पर्यवेक्षिकाओं और अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।

दूरदराज क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुंच
मुख्यमंत्री ने राज्य के दुर्गम और सुदूर क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति के साथ हर चुनौती को पार किया जा सकता है और सरकार इस दिशा में हर संभव सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि जब तक अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचेगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां समन्वय कमजोर होता है, वहां अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि आंगनबाड़ी सेविकाओं, CDPO और महिला पर्यवेक्षिकाओं के कार्यों का नियमित मूल्यांकन किया जाए और उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि विभाग से जुड़े कर्मियों को मोबाइल फोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी बनी रहे और योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी तरीके से हो सके।

सरकार का अभिन्न हिस्सा बनें कर्मी
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब वे सरकार का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। उन्होंने सभी से ईमानदारी, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपील की।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है और भविष्य में और भी सशक्त योजनाएं लागू की जाएंगी।
इस कार्यक्रम में मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विभागीय सचिव उमा शंकर सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
