Jharkhand News: सतगावां प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक जारी, युवक की दर्दनाक मौत के बाद ग्रामीणों ने गया-देवघर मार्ग किया जाम, सुरक्षा और मुआवजे की मांग तेज
Jharkhand News: झारखंड के कोडरमा जिले में हाथियों के बढ़ते हमलों से दहशत का माहौल है। सतगावां में एक युवक की दर्दनाक मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सड़क जाम कर वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।
Jharkhand News: झारखंड के कोडरमा जिले के सतगावां प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा घटना ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। शनिवार देर रात हाथियों के झुंड ने एक युवक को पटक-पटक कर मार डाला, जिसके बाद गुस्साए ग्रामीण रविवार को सड़क पर उतर आए और गया-देवघर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया।
मृतक की पहचान 30 वर्षीय मोहित कुमार के रूप में हुई है, जो कटैया गांव का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि मोहित कुमार अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। शनिवार देर रात वह अपने घर के पास ही था, तभी अचानक हाथियों का झुंड वहां पहुंच गया। इससे पहले कि वह संभल पाता, हाथियों ने उसे पकड़ लिया और बेरहमी से पटक-पटक कर उसकी जान ले ली।
इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
शुक्रवार रात को भी गजहर गांव में हाथियों ने भारी उत्पात मचाया था। एक महिला संजू देवी के घर का दरवाजा तोड़कर करीब 10 क्विंटल अनाज खा गए और घर के सामान को तहस-नहस कर दिया। गनीमत रही कि उस समय परिवार के सदस्य दूसरे घर में सो रहे थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले दो महीनों में कोडरमा के सतगावां, डोमचांच और मरकच्चो के सीमावर्ती इलाकों में हाथियों के हमलों में पांच से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में डर का माहौल है और लोग रात में जागकर अपनी सुरक्षा करने को मजबूर हैं।
घटना के विरोध में ग्रामीणों ने गया-देवघर मुख्य मार्ग को कटैया मोड़ के पास जाम कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वन विभाग केवल चेतावनी देकर अपनी जिम्मेदारी से बचता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा दिया जाए और इलाके में हाथियों के आतंक से निजात दिलाने के लिए स्थायी समाधान किया जाए।
सड़क जाम की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और पीड़ित परिवार को सरकारी प्रावधानों के तहत मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
साथ ही वनरक्षियों को निर्देश दिए गए हैं कि हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ा जाए और इलाके में गश्त बढ़ाई जाए। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए।
झारखंड के कई जिलों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। जंगलों के सिकुड़ने और भोजन की कमी के कारण हाथी अक्सर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में सरकार और वन विभाग के सामने यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना की जरूरत है, जिसमें हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर, पर्याप्त भोजन और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए आधुनिक उपाय शामिल हों।
कोडरमा की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे। ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
