Jharkhand: असम विधानसभा चुनाव के दौरान झारखंड के राजनीतिक मुद्दों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren अपनी सरकार के मंत्रियों के साथ करीब 15 दिनों तक असम में कैंप करते रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेताओं ने वहां आदिवासी समाज के बीच जाकर जनसभाएं कीं और अपनी पार्टी की नीतियों को प्रस्तुत किया। दूसरी ओर भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi गुवाहाटी, जोरहाट और दिसपुर में प्रचार करते नजर आए, जहां उन्होंने झारखंड की झामुमो गठबंधन सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाए। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने भी झारखंड के विकास मॉडल को लेकर टिप्पणी करते हुए वहां की स्थिति पर ध्यान देने की बात कही।
बंगाल चुनाव में झारखंड भाजपा की सक्रियता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी झारखंड भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य Pradeep Verma, पूर्व विधायक Anant Ojha और Satyanand Jha Batul पिछले एक महीने से बंगाल में कैंप कर चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। पार्टी ने बंगाल में अपने प्रचार को मजबूत करने के लिए झारखंड के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है, जिससे जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूती मिल सके और मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाई जा सके।
स्टार प्रचारकों में झारखंड के तीन बड़े चेहरे
भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए अपने 40 स्टार प्रचारकों की सूची निर्वाचन आयोग को सौंपी है, जिसमें झारखंड से तीन प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें Annapurna Devi, बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा के नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा झारखंड भाजपा के 100 से अधिक नेता और कार्यकर्ता पिछले लगभग तीन महीनों से बंगाल में सक्रिय हैं। पार्टी ने रांची, धनबाद और दुमका जैसे शहरों में बंगाल चुनाव के लिए विशेष हेल्पसेंटर भी स्थापित किए हैं, जहां से चुनावी रणनीति और समन्वय का काम किया जा रहा है।
राज्यों के चुनाव में पारस्परिक रणनीति और प्रभाव
राज्यों के चुनावों में अब नेताओं की सीमाएं राज्य तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि एक राज्य के नेता दूसरे राज्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसका उदाहरण झारखंड और असम के बीच राजनीतिक आदान-प्रदान में देखा जा सकता है, जहां हिमंता बिस्वा सरमा झारखंड में चुनाव के दौरान लगभग तीन महीने तक पार्टी की रणनीति संभाल चुके हैं। इस अनुभव का लाभ अब भाजपा को अन्य राज्यों में मिल रहा है, जहां कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच सीधा संपर्क और स्थानीय समझ चुनावी रणनीति को मजबूत बना रही है। ऐसे में असम और बंगाल जैसे राज्यों के चुनावों में झारखंड के नेताओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो रहे हैं।
