Jharkhand: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक पर्यटन उद्योग पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। आमतौर पर गर्मी की छुट्टियों में लोग विदेश यात्रा को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इस वर्ष स्थिति बदल गई है और लोग अपने ही देश में घूमने के लिए मजबूर हैं। विशेष रूप से विदेश यात्रा को लेकर अनिश्चितता और सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बुकिंग में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका सीधा असर झारखंड जैसे राज्यों के ट्रैवल सेक्टर पर भी पड़ा है, जहां सैकड़ों ट्रैवल एजेंट सक्रिय हैं।
झारखंड के ट्रैवल एजेंट्स को बड़ा झटका
झारखंड में लगभग 400 ट्रैवल एजेंट हैं, जिनमें से करीब 200 अंतरराष्ट्रीय टूर पैकेज में विशेषज्ञता रखते हैं। रांची टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तारिक खान के अनुसार, यह उनका पीक सीजन होता है, लेकिन इस बार कारोबार लगभग ठप हो गया है। Dubai, Turkey, United Kingdom, Azerbaijan और यूरोपीय देशों के लिए की गई सभी अंतरराष्ट्रीय टिकटें कैंसिल हो चुकी हैं। अकेले इस क्षेत्र से 30 से 40 लोगों ने अपनी यात्राएं रद्द कर दी हैं। ट्रैवल एजेंट्स के मुताबिक, इस सीजन में एक एजेंट का औसतन कारोबार एक करोड़ रुपये तक होता है, लेकिन इस बार कुल कारोबार शून्य के करीब पहुंच गया है।
घरेलू पर्यटन की ओर रुख
इस स्थिति के बीच लोग अब घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई यात्रियों ने विदेश की बजाय भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों का चयन किया है। झारखंड के भीतर भी कई आकर्षक स्थान मौजूद हैं, जिन्हें लोग अब एक्सप्लोर कर रहे हैं। ट्रैवल एजेंट शैलेश अग्रवाल के अनुसार, इस सीजन में करीब 500 लोगों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा रद्द कर दी और देश के भीतर घूमने का विकल्प चुना है। Goa, Himachal Pradesh, Rajasthan, Darjeeling और Sikkim जैसे सुरक्षित माने जाने वाले डेस्टिनेशन की ओर पर्यटकों का रुझान बढ़ा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भी एक लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है।
उद्योग को भारी नुकसान और भविष्य की चिंता
ट्रैवल इंडस्ट्री को इस सीजन में लगभग ₹2000 करोड़ का नुकसान हुआ है। पहले जहां एक सीजन में अच्छा खासा मुनाफा होता था, वहीं अब स्थिति बेहद खराब हो गई है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और बची हुई उड़ानों के किराए भी काफी बढ़ गए हैं, जिससे लोगों की यात्रा योजना और प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में रिकवरी मुश्किल है। वर्तमान परिस्थितियों में “सुरक्षा पहले” की भावना प्रमुख हो गई है और लोग अपने देश में ही सुरक्षित और सुलभ यात्रा विकल्पों को चुन रहे हैं।
