Jharkhand News: झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 1 से 12वीं तक का विच्छेदित पाठ्यक्रम (स्प्लिट-अप सिलेबस) जारी कर दिया है। इस नए सिलेबस के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को अधिक व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से संचालित करने की योजना बनाई गई है। परिषद ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि स्कूलों में पढ़ाई इसी नए पाठ्यक्रम के अनुसार ही हो। इसके साथ ही सामान्य स्कूलों के अलावा सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के लिए भी अलग से विस्तृत पाठ्यक्रम जारी किया गया है।
मासिक ब्लूप्रिंट और डिजिटल मॉनिटरिंग पर जोर
नए स्प्लिट सिलेबस में प्रत्येक विषय के लिए महीनेवार पढ़ाई का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है, जिससे शिक्षकों को यह स्पष्ट रहेगा कि किस माह में कौन सा अध्याय और गतिविधि पूरी करनी है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों को ‘जे गुरुजी ऐप’ पर नियमित रूप से मासिक प्रविष्टि करना अनिवार्य किया गया है। यह डिजिटल प्रणाली शिक्षण प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई है। इसके अलावा, सिलेबस को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और जैक की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि सभी संबंधित पक्ष आसानी से इसे एक्सेस कर सकें।
NEP 2020 के अनुरूप प्रैक्टिकल और गतिविधि आधारित शिक्षा
यह नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP 2020) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें विशेष रूप से कक्षा 9 से 12 तक प्रैक्टिकल और गतिविधि आधारित शिक्षण को अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक समझ और कौशल विकास को भी बढ़ावा देना है। JCERT के अनुसार इस पाठ्यक्रम का लक्ष्य शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक परिणामोन्मुख और अधिगम प्रतिफल केंद्रित बनाना है, ताकि छात्रों की सीखने की क्षमता में वास्तविक सुधार हो सके।
शिक्षकों के लिए सख्त निर्देश और प्रशासनिक सख्ती
झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक Shashi Ranjan ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं कि वे इस नए सिलेबस को स्कूलों में प्रभावी रूप से लागू कराएं। साथ ही, सभी शिक्षकों को विषयवार पाठ्य योजना तैयार करना अनिवार्य किया गया है। निर्देश के अनुसार, जो शिक्षक या पारा शिक्षक समय पर पाठ्य योजना तैयार नहीं करेंगे, उनका मई माह तक का वेतन या मानदेय रोका जा सकता है। इसके अलावा, नए सत्र के पहले दो महीनों अप्रैल और मई में आधारभूत आरंभिक कक्षाओं के आयोजन के भी निर्देश दिए गए हैं, जिससे छात्रों की शुरुआती पढ़ाई मजबूत हो सके।
