Jharkhand News: झारखंड सरकार हस्तशिल्प उद्योग को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और सामग्री उपलब्ध कराकर राज्य के कारीगरों को सशक्त बनाने की तैयारी में है। अगले वित्तीय वर्ष में हैंडीक्राफ्ट रिसोर्स सेंटरों में विभिन्न ट्रेडों के 270 कारीगरों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार का उद्देश्य यह है कि कारीगर बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार हों और उनके काम को आधुनिक तकनीकी मानकों के अनुसार विकसित किया जा सके। इस दिशा में रांची में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिज़ाइन, अहमदाबाद के सहयोग से स्थापित झारखंड इंस्टिट्यूट ऑफ क्राफ्ट डिज़ाइन (JICD) का संचालन किया जाएगा।
कारीगरों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और उपकरणों का वितरण किया जाएगा। ट्रेनिंग और आर्टिसन एम्प्लॉयमेंट प्रोग्राम के तहत 75 प्रतिशत सब्सिडी पर उपकरण और मशीनें वितरित की जाएंगी। इसके साथ ही पुराने एम्पोरियम को नवीनकरण करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। खादी वस्त्रों को लोकप्रिय बनाने और खादी उद्योग के विकास के लिए एकीकृत खादी योजना भी लागू की जा रही है। झारखंड के पारंपरिक लघु उद्योग जैसे पत्ता/थाली निर्माण, अचार निर्माण, चमड़े के शिल्प और अन्य उद्योगों को मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है।
मिट्टी, लकड़ी और बांस उद्योग में तकनीकी प्रशिक्षण
राज्य में टेराकोटा, बांस, कने, ढोक्रा, चित्रकला और गहनों का उत्पादन भी किया जाता है। इनके विकास के लिए आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। स्किल अपग्रेडेशन योजना के तहत लगभग 2,500 उद्यमियों को लाभ मिलेगा। योजना के अंतर्गत लगभग 2,000 लाभार्थियों को मशीन और उपकरण सब्सिडी के आधार पर वितरित किए जाएंगे। झारखंड की बड़ी आबादी मिट्टी के कारीगर परिवारों से संबंधित है, जो मूर्तियों, फूलदान, घड़े, हाथी और घोड़े जैसी सजावटी वस्तुओं के उत्पादन पर निर्भर हैं।
वित्तीय वर्ष में विशेष प्रशिक्षण और सब्सिडी योजनाएं
आगामी वित्तीय वर्ष में मिट्टी के कारीगरों के लिए 6 बैचों में 180 कारीगरों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना है। इसके साथ ही 1,000 इलेक्ट्रिक व्हील्स और 200 पगमिल्स 90:10 के अनुपात में सब्सिडी पर वितरित किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य कारीगरों की उत्पादन क्षमता बढ़ाना, आर्थिक स्थिति सुधारना और उनके उत्पादों का बाजार में सही मूल्य सुनिश्चित करना है। तकनीकी सुविधाएं, वित्तीय सहायता और विपणन समर्थन से कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और झारखंड की हस्तशिल्प परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
