Jharkhand News: नए साल के साथ झारखंड में भूजल संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने 2026 में भूजल स्तर को सुरक्षित रखने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाने का फैसला किया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, नगर निकाय और जिला प्रशासन मिलकर इस दिशा में समन्वित प्रयास करेंगे। इसका उद्देश्य राज्य के बढ़ते जल भंडार को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखना और भविष्य की जरूरतों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो अधिक वर्षा के बावजूद जल संकट की स्थिति दोबारा बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अभी से योजना पर काम तेज कर दिया है।
अधिक वर्षा से बढ़ा जल भंडार, संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती
बीते मानसून सीजन में झारखंड में औसत से लगभग 15 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। इसका सीधा असर राज्य के जल संसाधनों पर पड़ा है। राज्य का जल भंडार 7,046 क्यूबिक मीटर से बढ़कर करीब 8,000 क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के सहायक परामर्शदाता विनय मिश्रा के अनुसार यह स्थिति बेहद सकारात्मक है, लेकिन इससे भी बड़ी चुनौती इस भंडार को संरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि कृषि कार्यों के लिए गहरे बोरवेल से पानी के अत्यधिक दोहन पर रोक लगानी होगी। यदि अनियंत्रित तरीके से भूजल का उपयोग जारी रहा तो कुछ ही वर्षों में यह अतिरिक्त भंडार खत्म हो सकता है।
वर्षा जल संचयन और जल पुनर्भरण पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 में वर्षा जल संचयन को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाने की जरूरत है। छोटे और बड़े बांधों के कैचमेंट एरिया को बढ़ाने के साथ साथ तालाबों और जलाशयों के पुनर्जीवन पर भी जोर दिया जाएगा। विनय मिश्रा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जल पुनर्भरण प्रणाली को मजबूत करेंगी। इससे बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मदद मिलेगी और भूजल स्तर स्थिर रहेगा। नगर निकाय क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि शहरी इलाकों में तेजी से गिरते जल स्तर को रोका जा सके।
मिट्टी के चेक डैम बनेगे संरक्षण की रीढ़
जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त अभियंता कुशध्वज महतो ने कहा कि झारखंड जैसे पठारी राज्य में मिट्टी के चेक डैम भूजल संरक्षण के लिए बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे डैम वर्षा के पानी को रोककर धीरे धीरे जमीन में समाने में मदद करते हैं। 2026 में सरकारी योजनाओं के साथ साथ निजी प्रयासों को भी प्रोत्साहित करना होगा। इसके लिए लोगों को प्रोत्साहन राशि और तकनीकी सहयोग दिया जाना चाहिए। महतो ने कहा कि झारखंड में हर दस से पंद्रह साल में भारी वर्षा का चक्र आता है और इस दौरान जमा हुए जल को बचाना बेहद जरूरी है। यदि सही रणनीति अपनाई जाए तो यह जल भंडार राज्य को लंबे समय तक जल संकट से बचा सकता है।
