Jharkhand Weather Update : 01 जून से 18 जून 2026 तक राज्य में 59 प्रतिशत कम बारिश दर्ज, केवल रांची में सामान्य से अधिक वर्षापात; गढ़वा, पलामू और साहिबगंज सबसे अधिक प्रभावित
Jharkhand Weather Update : झारखंड में मानसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। 01 जून से 18 जून 2026 के बीच राज्य में सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है। रांची को छोड़कर सभी 23 जिलों में वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
झारखंड में तय समय पर मानसून की दस्तक के बावजूद इसकी शुरुआत उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे कृषि कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। विशेष रूप से धान उत्पादन पर निर्भर किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है।
मौसम केंद्र, रांची द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 01 जून से 18 जून 2026 के बीच राज्य में औसतन 30.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 74.9 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस प्रकार झारखंड में अब तक मानसून के दौरान 59 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
रांची को छोड़ सभी जिलों में सामान्य से कम बारिश
राज्य के 24 जिलों में से केवल रांची ही ऐसा जिला है जहां मानसून की शुरुआत सामान्य श्रेणी में रही है। बाकी 23 जिलों में वर्षा सामान्य से कम रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग के मानकों के अनुसार यदि वर्षा सामान्य औसत से 19 प्रतिशत कम या 19 प्रतिशत अधिक होती है तो उसे सामान्य श्रेणी में रखा जाता है।
रांची जिले में 01 जून से 18 जून के बीच 86.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य वर्षा 77.5 मिलीमीटर मानी जाती है। इस प्रकार रांची में सामान्य से 12 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत राज्य के अधिकांश जिलों में बारिश का गंभीर अभाव देखा गया है।
गढ़वा में एक बूंद भी बारिश नहीं, स्थिति सबसे खराब
मानसून की कमजोर शुरुआत का सबसे अधिक असर गढ़वा जिले में देखने को मिला है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार गढ़वा में इस अवधि के दौरान सामान्य रूप से 46.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार अब तक एक मिलीमीटर भी वर्षा दर्ज नहीं हुई है। यह सामान्य से 100 प्रतिशत कम वर्षा की स्थिति को दर्शाता है।
इसी तरह पलामू और साहिबगंज जिलों में 97 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। चतरा में सामान्य से 95 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि लोहरदगा में 94 प्रतिशत की कमी रिकॉर्ड की गई है।
इसके अलावा सरायकेला-खरसावां जिले में 84 प्रतिशत तथा खूंटी जिले में 77 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून अभी तक सक्रिय नहीं हो पाया है।
अल नीनो के प्रभाव से बढ़ी चिंता
मौसम वैज्ञानिक पहले ही इस वर्ष अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना जता चुके हैं। ऐसे में मानसून के शुरुआती दिनों में बारिश की भारी कमी ने चिंता को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। झारखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है और राज्य में धान प्रमुख फसल है। ऐसे में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
धान के बिचड़े तैयार करने में हो सकती है परेशानी
झारखंड में जून माह के दौरान किसान धान की खेती की तैयारी शुरू कर देते हैं। इस समय खेतों में नमी और पानी की आवश्यकता होती है ताकि धान के बिचड़े तैयार किए जा सकें। लेकिन बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में किसान अभी तक खेती की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाए हैं।
यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई का समय प्रभावित हो सकता है। इससे उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती बारिश की कमी की भरपाई बाद में होने वाली अच्छी वर्षा से संभव है, लेकिन इसके लिए मानसून का जल्द सक्रिय होना जरूरी है।
आने वाले दिनों में मौसम बदलने की उम्मीद
हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए राहत भरी खबर दी है। मौसम केंद्र, रांची के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इससे कृषि गतिविधियों को गति मिल सकती है और वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।
मौसम विभाग ने लोगों को गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं के दौरान सतर्क रहने की सलाह भी दी है। विशेष रूप से खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की गई है।
बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव बनने की संभावना
रांची मौसम केंद्र के निदेशक बाबूराज पीपी ने बताया कि फिलहाल झारखंड में मानसून कमजोर पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अनुकूल परिस्थितियां नहीं बनने के कारण मानसून रांची से आगे अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है।
उन्होंने जानकारी दी कि जून के अंतिम सप्ताह, विशेषकर 23 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की लगभग 50 प्रतिशत संभावना है। यदि यह सिस्टम विकसित होता है तो झारखंड के कई हिस्सों में व्यापक और अच्छी बारिश हो सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव क्षेत्र अक्सर झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अच्छी वर्षा लेकर आते हैं। ऐसे में किसानों और आम लोगों की निगाहें अब मौसम के आगामी बदलाव पर टिकी हुई हैं।
किसानों और सरकार की बढ़ी चिंता
मानसून की धीमी शुरुआत ने न केवल किसानों बल्कि प्रशासन और कृषि विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है। राज्य में खरीफ फसलों की बुवाई बड़े पैमाने पर वर्षा पर निर्भर करती है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर जोर देना पड़ सकता है।
फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई की शुरुआत में मानसून सक्रिय होगा और राज्य में अच्छी बारिश होगी। इससे किसानों को राहत मिलेगी और कृषि कार्यों में तेजी आएगी।
