Jharkhand News : हावड़ा-नई दिल्ली रेल मार्ग पर सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती, धनबाद-गया सेक्शन के 76 किलोमीटर हिस्से में शुरू हुआ कवच 4.0 सिस्टम; अक्टूबर तक प्रधानखंता तक विस्तार का लक्ष्य
Jharkhand News : भारतीय रेलवे ने ट्रेन परिचालन को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। धनबाद-गया रेलखंड पर स्वदेशी ‘कवच 4.0’ सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है। यह आधुनिक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कोहरे, खराब मौसम और कम दृश्यता की स्थिति में भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करेगा तथा दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम करेगा।
धनबाद-गया रेल मार्ग पर शुरू हुआ कवच 4.0 सिस्टम
भारतीय रेलवे देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल हावड़ा-नई दिल्ली मुख्य रेलखंड पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वदेशी ‘कवच’ तकनीक का तेजी से विस्तार कर रहा है। इसी कड़ी में धनबाद-गया रेल मार्ग के सरमाटांड़ से निमियाघाट तक 76 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर कवच 4.0 सिस्टम को चालू कर दिया गया है।
इस नई तकनीक के सक्रिय होने के बाद इस सेक्शन में चलने वाली यात्री और मालगाड़ियां अधिक सुरक्षित तरीके से संचालित की जा सकेंगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार अगले चरण में निमियाघाट से प्रधानखंता तक कवच प्रणाली स्थापित करने का कार्य शुरू हो चुका है।
अक्टूबर तक पूरा होगा विस्तार कार्य
रेलवे ने कवच परियोजना के विस्तार के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। योजना के अनुसार सितंबर 2026 तक निमियाघाट से तेतुलमारी सेक्शन में कवच सिस्टम स्थापित कर दिया जाएगा। इसके बाद तेतुलमारी से धनबाद होते हुए प्रधानखंता तक अक्टूबर 2026 तक यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद धनबाद मंडल के महत्वपूर्ण रेलखंडों पर ट्रेनों का संचालन पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत हो जाएगा।
163 रूट किलोमीटर पर चालू हुआ कवच 4.0
भारतीय रेलवे ने हाल ही में तीन अलग-अलग रेल सेक्शनों में कुल 163 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 प्रणाली को चालू किया है।
इनमें शामिल हैं:
- सरमाटांड़ से निमियाघाट (धनबाद मंडल) – 76 किमी
- फ्लाईओवर केबिन से भभुआ रोड (डीडीयू मंडल) – 43 किमी
- सासाराम से फेसर (डीडीयू मंडल) – 44 किमी
इन सभी सेक्शनों में अब ट्रेनों की निगरानी और सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या है कवच 4.0 सिस्टम?
कवच भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। यह माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS), रेडियो कम्युनिकेशन और आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग करके ट्रेनों की गति और स्थिति पर लगातार नजर रखता है।
यह प्रणाली लोको पायलट को संभावित खतरे की स्थिति में तुरंत चेतावनी देती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक भी लगा सकती है।
दुर्घटनाओं को रोकने में मिलेगी मदद
कवच 4.0 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ‘सिग्नल पासिंग एट डेंजर’ (SPAD) जैसी घटनाओं को रोकने में सक्षम है। यदि कोई ट्रेन लाल सिग्नल को पार करने का प्रयास करती है तो सिस्टम तुरंत सक्रिय होकर ट्रेन को नियंत्रित कर सकता है।
इसके अलावा यह निम्न प्रकार की दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करता है:
- आमने-सामने की टक्कर
- पीछे से होने वाली टक्कर
- साइड कोलिजन
- ओवरस्पीडिंग से होने वाले हादसे
इस तकनीक के कारण ट्रेन संचालन की सुरक्षा में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
कोहरे और खराब मौसम में भी रहेगा सुरक्षित संचालन
उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान घना कोहरा रेलवे परिचालन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कम दृश्यता के कारण ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
कवच 4.0 इस समस्या का समाधान प्रदान करता है। यह प्रणाली लोको पायलट को वास्तविक समय में आवश्यक जानकारी देती है, जिससे कोहरे, बारिश या अन्य प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में भी ट्रेनों का सुरक्षित संचालन संभव हो सकेगा।
लेवल क्रॉसिंग और गलत दिशा में मूवमेंट पर भी नजर
कवच सिस्टम केवल टक्कर रोकने तक सीमित नहीं है। यह गलत दिशा में ट्रेन की आवाजाही, रिवर्स मूवमेंट और अन्य असामान्य परिस्थितियों के दौरान भी अलर्ट जारी करता है।
साथ ही यह लेवल क्रॉसिंग गेट की स्थिति की जानकारी भी स्वचालित रूप से उपलब्ध कराता है, जिससे रेलवे कर्मचारियों और लोको पायलटों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।
रेल सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि
रेल विशेषज्ञों का मानना है कि कवच 4.0 भारतीय रेलवे के लिए सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। यह तकनीक भविष्य में देशभर के प्रमुख रेल मार्गों पर लागू की जाएगी। इससे न केवल रेल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि ट्रेनों की समयबद्धता और परिचालन क्षमता में भी सुधार होगा।
धनबाद-गया रेलखंड पर कवच 4.0 का सफल संचालन रेलवे के डिजिटल और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
