Passport Process with DigiLocker : डिजिलॉकर से दस्तावेज लिंक करने पर पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया होगी तेज, कम होंगी गलतियां और पुलिस वेरिफिकेशन भी होगा आसान
Passport Process with DigiLocker : पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं ज्यादा तेज, डिजिटल और आसान हो गई है। डिजिलॉकर के जरिए दस्तावेज अपलोड करने से पासपोर्ट 8-10 दिन पहले मिल सकता है, साथ ही आवेदन में होने वाली त्रुटियां भी कम होंगी। जानिए कैसे यह नई प्रक्रिया लोगों का समय और पैसा दोनों बचा रही है।
देश में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ अब पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया भी तेजी से बदल रही है। पहले जहां पासपोर्ट बनवाने के लिए लंबी प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और कई बार अतिरिक्त शुल्क देकर तत्काल सेवा लेने की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब डिजिलॉकर इस पूरी प्रक्रिया को आसान और तेज बना रहा है। यदि आवेदक अपने दस्तावेज सीधे डिजिलॉकर के माध्यम से पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर अपलोड करते हैं, तो सामान्य प्रक्रिया की तुलना में उनका पासपोर्ट 8 से 10 दिन पहले बनकर घर पहुंच सकता है।
डिजिलॉकर से क्यों तेज होगी पासपोर्ट प्रक्रिया?
पासपोर्ट विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सामान्य तरीके से आवेदन करने पर स्कैन कॉपी अपलोड करने और दस्तावेजों की जांच में काफी समय लग जाता है। आमतौर पर इस प्रक्रिया में 21 से 25 दिन तक लग सकते हैं। वहीं, डिजिलॉकर से जुड़े दस्तावेज पहले से सरकारी रिकॉर्ड में सत्यापित रहते हैं, जिससे सत्यापन प्रक्रिया तेजी से पूरी हो जाती है।
डिजिलॉकर के जरिए आवेदन करने पर पासपोर्ट प्रक्रिया करीब 14 से 15 दिनों में पूरी होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे न केवल आवेदन जल्दी निपटते हैं बल्कि लंबित मामलों की संख्या भी कम होती है।
पलामू जैसे जिलों के लोगों को मिलेगा बड़ा फायदा
झारखंड के पलामू जिले में फिलहाल कोई स्वतंत्र पासपोर्ट सेवा केंद्र या कार्यालय मौजूद नहीं है। यह क्षेत्र रांची क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में लोगों को आवेदन और अन्य प्रक्रियाओं के लिए रांची जाना पड़ता है।
डिजिलॉकर आधारित सत्यापन व्यवस्था ऐसे जिलों के लोगों के लिए राहत साबित हो सकती है, क्योंकि डिजिटल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से फिजिकल दस्तावेजों की निर्भरता कम होगी और प्रक्रिया तेज होगी।
दस्तावेजों की गलतियों से बचाएगा डिजिलॉकर
पासपोर्ट आवेदन लंबित होने की सबसे बड़ी वजह दस्तावेजों में त्रुटियां मानी जाती हैं। कई मामलों में आवेदक अलग-अलग दस्तावेजों में अलग नाम, जन्मतिथि या पते की जानकारी दे देते हैं।
इसके अलावा इन समस्याओं के कारण भी आवेदन अटक जाते हैं:
- अस्पष्ट स्कैन कॉपी अपलोड करना
- अधूरे दस्तावेज जमा करना
- गलत प्रमाणपत्र लगाना
- दस्तावेजों में जानकारी का मेल नहीं होना
डिजिलॉकर से दस्तावेज सीधे सरकारी डेटाबेस से आते हैं, इसलिए इन समस्याओं की संभावना काफी कम हो जाती है।
पुलिस वेरिफिकेशन में भी लगेगा कम समय
पासपोर्ट जारी करने से पहले विभागीय और पुलिस स्तर पर सत्यापन जरूरी होता है। आमतौर पर सबसे ज्यादा समय पुलिस जांच में लगता है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिलॉकर से जुड़े आधार, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज पहले से सत्यापित रहते हैं, इसलिए पुलिस को दोबारा कई स्तरों पर जांच करने की जरूरत कम पड़ती है।
इससे पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया भी तेज हो सकती है और आवेदकों को जल्द पासपोर्ट मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
डिजिलॉकर से पासपोर्ट आवेदन के बड़े फायदे
डिजिलॉकर के इस्तेमाल से आवेदकों को कई फायदे मिल सकते हैं:
- दस्तावेज सीधे सरकारी रिकॉर्ड से सत्यापित होंगे
- स्कैन कॉपी अपलोड करने की जरूरत कम होगी
- आवेदन में आपत्ति की संभावना घटेगी
- पुलिस सत्यापन प्रक्रिया तेज होगी
- फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगेगी
- समय और अतिरिक्त खर्च दोनों की बचत होगी
ऐसे करें डिजिलॉकर को पासपोर्ट पोर्टल से लिंक
यदि आप डिजिलॉकर का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो यह प्रक्रिया अपनाएं:
- पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर आवेदन भरें
- डिजिलॉकर अकाउंट को लिंक करने का विकल्प चुनें
- आधार, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज लिंक करें
- उपलब्ध दस्तावेज स्वतः पोर्टल पर दिखाई देने लगेंगे
- अलग से फोटोकॉपी या स्कैन कॉपी अपलोड करने की जरूरत कम पड़ जाएगी
पेपरलेस सिस्टम की ओर बढ़ रहा विभाग
पासपोर्ट विभाग आने वाले समय में अधिकतर सेवाओं को पूरी तरह पेपरलेस बनाने की दिशा में काम कर रहा है। डिजिटल दस्तावेजों के इस्तेमाल से न केवल प्रक्रिया आसान होगी बल्कि पारदर्शिता और सुरक्षा भी बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, डिजिलॉकर आधारित पासपोर्ट आवेदन प्रणाली उन लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है जो समय, अतिरिक्त शुल्क और दस्तावेजी परेशानियों से बचना चाहते हैं। डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब पासपोर्ट बनवाना पहले से कहीं ज्यादा आसान होता दिख रहा है।
