Jharkhand News : बारिश और उमस बढ़ते ही झारखंड में तेजी से बढ़े सर्पदंश के मामले, स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को जारी की नई गाइडलाइन, मुफ्त इलाज और एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराने का आदेश
Jharkhand News : झारखंड में लगातार बढ़ रहे सर्पदंश के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित करते हुए सभी अस्पतालों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता, मुफ्त इलाज और हर मामले की अनिवार्य रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा है।
रांची : झारखंड में मानसून के आगमन और लगातार बढ़ रही उमस के बीच सर्पदंश के मामलों में तेजी देखी जा रही है। ग्रामीण और जंगल से सटे इलाकों में हर साल बारिश के मौसम में सांप काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर के सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित करते हुए सभी अस्पतालों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कहा है कि अब सर्पदंश के हर संदिग्ध और पुष्ट मामले की रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। इससे राज्य में सर्पदंश की वास्तविक स्थिति का आंकलन करने और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सभी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध रखने का आदेश
स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम सीरम उपलब्ध रखने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में यह दवा मरीजों को मुफ्त दी जाएगी।
इसके अलावा आपात स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी तैयारी की जा रही है। विभाग का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।
सांप काटने पर क्या करें और क्या नहीं
नई गाइडलाइन में लोगों को जागरूक करने के लिए जरूरी सावधानियां भी बताई गई हैं। विभाग ने कहा है कि सांप काटने के बाद घाव को काटना, जहर चूसने की कोशिश करना या बहुत कसकर कपड़ा बांधना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे उपाय मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि सर्पदंश की स्थिति में मरीज को शांत रखें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। जरूरत पड़ने पर 108 एम्बुलेंस सेवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इलाज में थोड़ी भी देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
झाड़-फूंक के कारण बढ़ रहा खतरा
स्वास्थ्य विभाग ने चिंता जताई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग सांप काटने के बाद अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और ओझाओं के चक्कर में पड़ जाते हैं। इससे इलाज में देरी होती है और मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इसी समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने लोगों को जागरूक करने के लिए एएनएम, सहिया और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। गांव-गांव जाकर लोगों को यह बताया जाएगा कि सर्पदंश की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
तीन साल में तेजी से बढ़े सर्पदंश के मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में पिछले कुछ वर्षों में सर्पदंश के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में जहां सर्पदंश के 392 मामले सामने आए थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 4078 पहुंच गया। इस दौरान 26 लोगों की मौत भी हुई।
वहीं वर्ष 2026 में अप्रैल महीने तक ही 561 सर्पदंश के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बारिश का मौसम आगे बढ़ने के साथ इन मामलों में और वृद्धि हो सकती है। इसी वजह से अभी से स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
ग्रामीण इलाकों में विशेष सतर्कता की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार खेतों, जंगलों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सांपों का खतरा अधिक रहता है। बारिश के मौसम में सांप अक्सर सुरक्षित जगह की तलाश में घरों और बस्तियों की ओर आ जाते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें, खेतों में काम करते समय जूते पहनें और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें। साथ ही किसी भी सर्पदंश की घटना को हल्के में न लें और तुरंत अस्पताल पहुंचें।
