Jharkhand News : ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए सहकारी मॉडल अपनाने की अपील
Jharkhand News : Kalpana Soren ने महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने लिज्जत पापड़ मॉडल को महिलाओं की सामूहिक शक्ति और सहकारिता आधारित विकास का सफल उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे मॉडल को झारखंड समेत पूरे देश में बढ़ावा देने की जरूरत है।
रांची : गांडेय विधायक Kalpana Soren ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और ग्रामीण विकास को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अहम संदेश साझा किया है। उन्होंने “संघे शक्ति कलियुगे” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए प्रसिद्ध सहकारी संस्था लिज्जत पापड़ को महिला सशक्तिकरण और सामूहिक सहयोग का प्रेरणादायी मॉडल बताया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था ने सामूहिक शक्ति और सहयोग की भावना को वास्तविक रूप दिया है, तो वह श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ है। यह संस्था महिलाओं के आत्मविश्वास, सहयोग और सामूहिक मेहनत की मिसाल बन चुकी है। कल्पना सोरेन ने कहा कि लिज्जत पापड़ केवल एक व्यवसायिक संगठन नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाला सामाजिक आंदोलन है, जिसने लाखों महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार और नई पहचान दी है।
लिज्जत पापड़ मॉडल से महिलाओं को मिली नई पहचान
कल्पना सोरेन ने अपने संदेश में कहा कि लिज्जत पापड़ मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को अवसर, सहयोग और सही मंच मिले तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस मॉडल ने महिलाओं को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराया और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया।
उन्होंने विशेष रूप से विकेंद्रित उत्पादन प्रणाली यानी “डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोडक्शन मॉडल” की सराहना की। इस व्यवस्था में महिलाएं अपने घर या स्थानीय स्तर पर रहकर उत्पादन कार्य कर सकती हैं। इससे वे पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ी रहती हैं। विधायक ने कहा कि यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है, जहां रोजगार के अवसर सीमित होते हैं।
गृह एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत
गांडेय विधायक ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए गृह उद्योग, कुटीर उद्योग और सहकारी मॉडल को बढ़ावा देना समय की मांग है। उन्होंने सुझाव दिया कि लिज्जत पापड़ जैसे मॉडल को हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, दुग्ध उत्पादन और लघु उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी लागू किया जाना चाहिए।
उनका मानना है कि इससे गांवों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। साथ ही स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में जहां ग्रामीण आबादी अधिक है, वहां इस तरह के मॉडल आर्थिक विकास की नई दिशा दे सकते हैं।
सरकार और सामाजिक संस्थाओं से सहयोग की अपील
कल्पना सोरेन ने सरकार, निजी संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों से मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि समन्वित प्रयास किए जाएं तो ग्रामीण परिवारों को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल सहायता की जरूरत नहीं, बल्कि अवसर और विश्वास की आवश्यकता है। यदि उन्हें सही प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो वे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा संदेश
कल्पना सोरेन का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोगों ने उनके विचारों की सराहना करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए सहकारिता आधारित मॉडल आज के समय में बेहद जरूरी है। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि लिज्जत पापड़ जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि सामूहिक प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए, तो पलायन कम होगा और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। महिला समूहों और स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार आधारित मॉडल विकसित करना आज के समय की बड़ी जरूरत बन चुकी है।
