Jharkhand : प्रमोशन के बाद भी इंतजार खत्म नहीं, 64 अधिकारियों में बढ़ रही नाराजगी
Jharkhand पुलिस विभाग में 64 इंस्पेक्टरों को DSP पद पर प्रोन्नति मिले 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी पोस्टिंग नहीं हो सकी है। कई अधिकारी बिना प्रमोशन लाभ के ही रिटायर हो चुके हैं, जबकि कई सेवानिवृत्ति के करीब हैं। अधिकारियों में सरकार और गृह विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
Jharkhand पुलिस विभाग में प्रोन्नति के बाद भी पदस्थापन नहीं होने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा 25 जून 2025 को 64 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद पर प्रोन्नत किया गया था, लेकिन करीब 11 महीने बीत जाने के बाद भी इन अधिकारियों की नियमित पोस्टिंग नहीं हो सकी है। इस देरी के कारण कई अधिकारी न सिर्फ मानसिक तनाव झेल रहे हैं, बल्कि उन्हें डीएसपी संवर्ग से मिलने वाले आर्थिक और सेवा संबंधी लाभ भी नहीं मिल पा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रोन्नति संबंधी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अधिकारियों को पदस्थापन की तिथि से ही डीएसपी पद का लाभ मिलेगा। लेकिन पोस्टिंग नहीं होने की वजह से सभी अधिकारी अब भी पुराने पद और वेतनमान में ही काम करने को मजबूर हैं। इससे पुलिस महकमे के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इन 64 अधिकारियों में से छह अधिकारी अब तक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दो अधिकारी इसी महीने रिटायर होने वाले हैं। सबसे दुखद स्थिति यह है कि कई अधिकारियों को सेवानिवृत्ति से महज दो या पांच दिन पहले औपचारिक रूप से विशेष शाखा में पोस्टिंग देकर डीएसपी का लाभ दिया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर समय रहते इन अधिकारियों को नियमित पदस्थापन क्यों नहीं दिया गया।
31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले नवप्रोन्नत डीएसपी अधिकारियों में अजय कुमार और सुधीर प्रसाद साहू का नाम शामिल है। इन अधिकारियों ने भी अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों तक पोस्टिंग का इंतजार किया, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है।
इससे पहले जनवरी 2026 में चार अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनमें गिरिडीह जिला बल के इंस्पेक्टर शैलेश प्रसाद, विशेष शाखा रांची के इंस्पेक्टर अखिलेश्वर प्रसाद मंडल, सरोज कुमार सिंह और विनोद उरांव शामिल थे। इन अधिकारियों को भी रिटायरमेंट से दो दिन पहले विशेष शाखा में औपचारिक पोस्टिंग दी गई थी ताकि उन्हें डीएसपी पद से जुड़े सेवा लाभ मिल सकें।
पुलिस विभाग के भीतर यह चर्चा तेज है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइलों की धीमी प्रक्रिया और विभागीय समन्वय की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई है। प्रमोटेड अधिकारियों ने कई बार अपने वरीय अधिकारियों और गृह सचिव से मुलाकात कर जल्द पदस्थापन की मांग की, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
सेवा के अंतिम चरण में पहुंच चुके अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा से राज्य की सेवा की, लेकिन प्रमोशन के बाद भी उन्हें उसका सम्मान और अधिकार समय पर नहीं मिल सका। कई अधिकारियों के परिवारों में भी इसको लेकर निराशा का माहौल है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर पदस्थापन नहीं होता है तो इससे पुलिस विभाग के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विभाग में वर्षों की मेहनत और अनुभव के बाद मिलने वाली प्रोन्नति यदि सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाए, तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
अब सभी की नजर राज्य सरकार और गृह विभाग पर टिकी हुई है कि आखिर इन प्रमोटेड डीएसपी अधिकारियों को कब नियमित पदस्थापन मिलेगा और उन्हें उनके अधिकारों का पूरा लाभ कब तक मिल पाएगा।
