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Jharkhand JTET में अंगिका और क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने की जगी उम्मीद, हाई लेवल कमेटी का गठन

Jharkhand JTET : मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर सरकार सक्रिय, क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मान दिलाने की तैयारी 

Jharkhand JTET : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में अंगिका सहित क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो भाषाई स्थिति और जनभावनाओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इस फैसले से छात्रों और भाषा प्रेमियों में नई उम्मीद जगी है।

झारखंड में लंबे समय से चल रही मांग को लेकर अब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी JTET में अंगिका सहित कई क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की उम्मीद मजबूत हो गई है। राज्य सरकार ने इस विषय पर गंभीरता दिखाते हुए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर अपनी अनुशंसा सरकार को सौंपेगी।

यह पहल महागामा विधायक एवं ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री Deepika Pandey Singh की सक्रियता के बाद सामने आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री Hemant Soren से मुलाकात कर क्षेत्रीय भाषाओं को JTET परीक्षा में शामिल करने की मांग रखी थी।

स्थानीय युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने की मांग

13 अप्रैल को हुई मुलाकात में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा था कि झारखंड के कई हिस्सों, खासकर संथालपरगना क्षेत्र में अंगिका, संथाली, मगही, मैथिली, भोजपुरी, कुड़माली और खोरठा जैसी भाषाएं बड़े पैमाने पर बोली जाती हैं। बावजूद इसके, शिक्षक पात्रता परीक्षा में इन भाषाओं को विकल्प के रूप में शामिल नहीं किया गया है।

मंत्री ने तर्क दिया कि जब स्थानीय युवा अपनी मातृभाषा में शिक्षा और संवाद करते हैं, तब प्रतियोगी परीक्षाओं में उन भाषाओं की अनुपस्थिति उनके लिए अवसरों को सीमित कर देती है। इससे ग्रामीण और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ता है।

कैबिनेट बैठक के बाद बढ़ा था विरोध

हाल ही में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में अंगिका को शामिल नहीं किए जाने को लेकर छात्रों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखी गई थी। सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न छात्र संगठनों तक इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया। भाषा प्रेमियों का कहना था कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान उसकी भाषाई विविधता से जुड़ी है और क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी उचित नहीं है।

विरोध बढ़ने के बाद सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए 5 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर हाई लेवल कमेटी के गठन की घोषणा कर दी।

समिति करेगी भाषाई स्थिति और जनभावनाओं का अध्ययन

सरकार द्वारा गठित यह समिति राज्य के अलग-अलग जिलों में भाषाई स्थिति, सामाजिक जरूरतों और व्यावहारिक पक्षों का अध्ययन करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में कौन-कौन सी भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं और उन्हें परीक्षा प्रणाली में किस प्रकार शामिल किया जा सकता है।

समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे का निर्णय लेगी। माना जा रहा है कि यदि समिति सकारात्मक रिपोर्ट देती है तो भविष्य में JTET परीक्षा में कई क्षेत्रीय भाषाओं को विकल्प के रूप में शामिल किया जा सकता है।

समिति में शामिल किए गए कई मंत्री

इस उच्च स्तरीय समिति में राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों को शामिल किया गया है। वित्त मंत्री Radha Krishna Kishore को समिति का समन्वयक बनाया गया है। वहीं श्रम मंत्री Sanjay Prasad Yadav, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल मंत्री Yogendra Prasad और नगर विकास मंत्री Sudivya Kumar को सदस्य बनाया गया है।

सरकार का कहना है कि समिति सभी पक्षों से विचार-विमर्श कर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार करेगी।

भाषा प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में खुशी

सरकार के इस कदम का अंगिका साहित्य कला मंच समेत कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने स्वागत किया है। भाषा प्रेमियों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और पहचान का सवाल है।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में समावेश राज्य की संस्कृति और अस्मिता से जुड़ा विषय है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार स्थानीय युवाओं की भावनाओं का सम्मान करेगी।

अब छात्रों, अभ्यर्थियों और भाषा प्रेमियों की नजर समिति की रिपोर्ट और राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। यदि यह पहल सफल होती है, तो झारखंड में क्षेत्रीय भाषाओं को नई पहचान और सम्मान मिलने की संभावना और मजबूत हो जाएगी।

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