Dhanbad केंदुआडीह क्षेत्र को घोषित किया गया डेंजर जोन, प्रशासन ने विस्थापन को बताया एकमात्र विकल्प
Dhanbad के केंदुआडीह इलाके में सड़क धंसने के बाद बड़े पैमाने पर गैस रिसाव शुरू हो गया है, जिससे 500 से अधिक परिवारों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। वैज्ञानिक संस्थानों की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित करते हुए तत्काल विस्थापन की योजना तेज कर दी है।
Dhanbad के केंदुआडीह इलाके में धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क के अचानक धंसने के दूसरे दिन हालात और गंभीर हो गए, जब जमीन के नीचे से तेजी से गैस रिसाव शुरू हो गया। इस अप्रत्याशित घटना से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने पहले हल्की दरारें देखीं, लेकिन देखते ही देखते सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया और वहां से गैस निकलने लगी।

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और खनन कंपनियों के अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थिति का जायजा लेने के बाद स्पष्ट हुआ कि यह कोई सामान्य भू-धंसान नहीं बल्कि लंबे समय से जल रही भूमिगत आग और खनन गतिविधियों का परिणाम है।
Dhanbad के उपायुक्त आदित्य रंजन ने स्पष्ट रूप से कहा कि भूमिगत आग के कारण गैस रिसाव को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय के साथ यह समस्या और गंभीर होती जाएगी और प्रभावित क्षेत्र का दायरा भी बढ़ सकता है।
बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने भी वैज्ञानिक संस्थानों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे में यहां रहने वाले लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
इस घटना के बाद आईआईटी आईएसएम, खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) और सिंफर जैसे प्रमुख तकनीकी संस्थानों की टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच के बाद सभी संस्थानों ने एकमत से यह निष्कर्ष निकाला कि पूरा इलाका “डेंजर जोन” बन चुका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमिगत कोयला खदानों में लगी आग वर्षों से धीरे-धीरे फैल रही है, जिससे जमीन कमजोर हो चुकी है। इसी कारण अचानक भू-धंसान और गैस रिसाव जैसी घटनाएं हो रही हैं।
इस घटना से करीब 500 से अधिक परिवार सीधे प्रभावित हुए हैं। इन परिवारों के घर, सड़कें और आस-पास की संरचनाएं खतरे में हैं। स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल है।
कई परिवारों ने बताया कि उन्हें रातों-रात घर छोड़ने की स्थिति बन रही है। कुछ लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं और अचानक विस्थापन उनके लिए भावनात्मक और आर्थिक रूप से कठिन है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित परिवारों को झरिया मास्टर प्लान 2.0 के तहत बेलगड़िया में बसाया जाएगा। यहां उन्हें बेहतर सुविधाओं के साथ पुनर्वास दिया जा रहा है।
सरकार की योजना के अनुसार:
- प्रत्येक प्रभावित परिवार को दो फ्लैट दिए जाएंगे
- रोजगार के लिए कौशल विकास केंद्र उपलब्ध होगा
- बिजली, पानी, सोलर लाइट, सड़क और परिवहन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी
- स्कूल और हेल्थ सेंटर भी मौजूद होंगे
अधिकारियों का कहना है कि बेलगड़िया में दी जा रही सुविधाएं किसी निजी सोसाइटी से कम नहीं होंगी।
प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के चलते प्रभावित परिवारों को भ्रमित कर रहे हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने से रोक रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
Dhanbad और झरिया क्षेत्र में भूमिगत आग और भू-धंसान कोई नई समस्या नहीं है। पिछले कई दशकों से यहां कोयला खदानों में लगी आग के कारण जमीन लगातार कमजोर हो रही है। कई बार सड़कें, घर और पूरी बस्तियां धंस चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और लोगों को वहां जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। साथ ही, गैस रिसाव की निगरानी के लिए विशेष टीम तैनात की गई है।
सरकार अब तेजी से विस्थापन प्रक्रिया को पूरा करने पर ध्यान दे रही है, ताकि किसी भी बड़े हादसे से पहले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
Dhanbad के केंदुआडीह में हुई यह घटना एक गंभीर चेतावनी है, जो बताती है कि भूमिगत आग और अनियंत्रित खनन गतिविधियों का खतरा कितना बड़ा हो सकता है। प्रशासन और वैज्ञानिक संस्थानों की चेतावनी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे में प्रभावित परिवारों का जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर जाना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा।
