Jharkhand News: झारखंड में विभिन्न जिलों के कोषागार से अवैध निकासी के मामले को लेकर राजनीतिक तनाव तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी झामुमो ने भारतीय जनता पार्टी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार और भ्रामक बताया है। पार्टी के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं की जड़ें भाजपा सरकार के कार्यकाल से जुड़ी हैं। उनके अनुसार पूर्व में भी इस तरह की गड़बड़ियों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया था।
पूर्व सरकार पर गंभीर आरोप और जांच की बात
झामुमो ने आरोप लगाया कि कोषागार से अवैध निकासी का मामला 14 साल पहले भाजपा सरकार के समय शुरू हुआ था और बाद में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में यह और बढ़ा। विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि उस समय किसी ने इस कथित घोटाले को रोकने या उजागर करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देकर साहसिक कदम उठाया है। झामुमो का दावा है कि सरकार इस पूरे मामले की जड़ तक जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासनिक कार्रवाई और कोषागार में सख्ती
इसी बीच जमशेदपुर में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कोषागार का औचक निरीक्षण किया और वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने कोषागार के माध्यम से होने वाली सभी निकासी और भुगतान प्रक्रियाओं पर गहन निगरानी रखने का आदेश दिया। उपायुक्त ने कहा कि कोषागार राज्य की वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होता है इसलिए इसमें पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने कोषागार पदाधिकारी को निर्देश दिया कि हर डीडीओ बिल की बारीकी से जांच की जाए ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को समाप्त किया जा सके।
वेतन भुगतान और वित्तीय सत्यापन पर सख्त नियम
उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान से पहले सभी दस्तावेजों का सही सत्यापन अनिवार्य होगा। उन्होंने निर्देश दिया कि कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, पदनाम, जन्म तिथि और बैंक खाता विवरण का मिलान पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा यह भी कहा गया कि केवल वास्तविक रूप से कार्यरत कर्मचारियों को ही वेतन दिया जाए। उन्होंने कोषागार कर्मियों की प्रतिनियुक्ति, बुक ट्रांसफर, सब अलॉटमेंट और पीएल खातों की भी विस्तृत समीक्षा करने का आदेश दिया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि अनावश्यक राशि को समय रहते विभागों से समन्वय कर सरेंडर कराया जाए ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे।
