Jharkhand News: बोकारो से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां Harvinder Singh ने पुष्पा महतो अपहरण और हत्या केस में बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए पिंड्राजोरा थाना प्रभारी अभिषेक रंजन समेत पूरे थाने के 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित कर्मियों में 10 सब इंस्पेक्टर, 5 सहायक अवर निरीक्षक, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं। इस कार्रवाई ने पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है और मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
24 जुलाई से लापता थी युवती शिकायत के बाद भी दर्ज हुई देरी से FIR
यह मामला 24 जुलाई 2025 का है जब युवती के लापता होने की सूचना उसकी मां ने पुलिस को दी थी। लेकिन गंभीर बात यह रही कि शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में दस दिन की देरी की गई और चार अगस्त को मामला दर्ज किया गया। इस दौरान थाना स्तर पर जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था, जिसका नेतृत्व तत्कालीन थाना प्रभारी अभिषेक रंजन कर रहे थे। लेकिन जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर मामला और गंभीर हो गया।
लापरवाही और मिलीभगत के आरोप दूसरी SIT ने एक दिन में किया खुलासा
जांच में लापरवाही सामने आने के बाद Harvinder Singh ने सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में दूसरी एसआईटी का गठन किया। इस टीम ने सिर्फ एक दिन में ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया। जांच में आरोपित की गिरफ्तारी के बाद युवती की हत्या का सच सामने आया और उसकी हड्डियां, बाल तथा हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी और मृतका के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे।
पुलिस पर गंभीर आरोप आरोपित के साथ पार्टी और पैसे के लेनदेन की जांच
एसपी के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि थाना स्तर पर गंभीर लापरवाही के साथ-साथ अनुशासनहीनता भी हुई। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने जांच में आरोपित को लाभ पहुंचाने की कोशिश की और कांड को कमजोर किया। यहां तक कि आरोपित के साथ थाने में पार्टी करने और पैसे के लेनदेन की शिकायतें भी सामने आई हैं। इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पीड़ित परिवार पहले ही न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुका है, जहां पुलिस की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी की गई थी।
