Jharkhand High Court में बुधवार को दो अहम मामलों पर सुनवाई हुई, जिसने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। एक ओर अदालत ने राज्य की डोमिसाइल नीति में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया, तो वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री Alamgir Alam से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दायर डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। इन दोनों मामलों को राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एक सीधे आम लोगों के अधिकारों से जुड़ा है, जबकि दूसरा बड़े राजनीतिक विवाद का हिस्सा है।
डोमिसाइल नीति पर कोर्ट का रुख साफ
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने डोमिसाइल नीति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह राज्य सरकार की नीति से जुड़ा मामला है। अदालत ने कहा कि नीति में बदलाव या संशोधन करना न्यायपालिका का काम नहीं बल्कि सरकार का अधिकार है। याचिकाकर्ता संगठन ने तर्क दिया था कि जिन लोगों की जमीन विकास कार्यों के लिए अधिग्रहित की जाती है, उन्हें डोमिसाइल नीति में विशेष मान्यता मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि विस्थापित लोग अपनी जमीन गंवाने के बाद भी स्थानीय निवासी का लाभ नहीं ले पाते, जिससे उन्हें कई योजनाओं से वंचित रहना पड़ता है। हालांकि कोर्ट ने इस पर कोई सीधा हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
आलमगीर आलम केस में सुनवाई पूरी
दूसरी ओर पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी Enforcement Directorate ने आरोप लगाया है कि ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन के दौरान भारी घोटाला हुआ और कमीशन के रूप में करोड़ों रुपये लिए गए। यह मामला तब चर्चा में आया जब ईडी ने मंत्री के करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 32 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि इस रकम का एक हिस्सा सीधे मंत्री तक पहुंचा था।
नजरें कोर्ट के अगले कदम पर
इन दोनों मामलों के फैसले का असर झारखंड की राजनीति और प्रशासन पर दूरगामी हो सकता है। जहां डोमिसाइल नीति पर कोर्ट के रुख से यह साफ हो गया है कि अब गेंद पूरी तरह सरकार के पाले में है, वहीं आलमगीर आलम के मामले में आने वाला फैसला राजनीतिक माहौल को और गरमा सकता है। फिलहाल राज्य की जनता और राजनीतिक दलों की नजर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत का अगला कदम राज्य के राजनीतिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है।
