Jharkhand News: झारखंड के धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के पहाड़ी तराई क्षेत्र में कचरे से ईंधन बनाने के लिए बिकेटिंग प्लांट (Briquetting Plant) स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के तहत लकड़ी का बुरादा, कोयले की धूल, धान का भूसा, गन्ने का बगास और अन्य कृषि अपशिष्ट जैसे बेकार कचरे को दबाकर ठोस ईंधन यानी ब्रिकेट में बदला जाएगा। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत को भी बढ़ावा देगी। टुंडी के दुर्गाडीह गांव में इस प्लांट के निर्माण का प्रस्ताव है और इसके लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार और आय का नया साधन
इस परियोजना से स्थानीय ग्रामीणों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। झारखंड विधानसभा में सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक और टुंडी के विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने जानकारी दी कि यह प्लांट क्षेत्र के लोगों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि टुंडी के जंगलों में पतझड़ के दौरान बड़ी मात्रा में पत्ते गिरते हैं, जिन्हें अब एकत्र कर प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। इसके बदले ग्रामीणों को उचित पारिश्रमिक मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। खेती-बाड़ी के बाद खाली समय में यह कार्य ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा माध्यम बन सकता है।
ब्रिकेट का उपयोग और पर्यावरणीय लाभ
बिकेटिंग प्लांट में कचरे को मशीनों के माध्यम से उच्च दबाव में दबाकर छोटे-छोटे ठोस ब्रिकेट बनाए जाते हैं, जिनका उपयोग बॉयलर, भट्टियों और उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जाता है। ये ब्रिकेट कोयले का एक बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प साबित हो सकते हैं। इस पहल से न केवल कचरे का सही उपयोग होगा, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही, जंगलों से मिलने वाले सूखे पत्तों और कृषि अपशिष्ट का सदुपयोग होने से संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
अन्य विकास कार्य और वन संरक्षण की पहल
इसी दौरान विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने गादीटुंडी पौधशाला में वन विभाग द्वारा 49 लाख रुपये की लागत से बनने वाली अतिथि शाला के निर्माण कार्य का निरीक्षण भी किया। उन्होंने बताया कि टुंडी के लोगों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। इसके अलावा, लंबे समय से बंद बेगनोरिया-तिलैया मार्ग के पुनर्निर्माण की योजना पर भी काम किया जाएगा। जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालिवार ने जानकारी दी कि टुंडी और तोपचांची वन क्षेत्र में कई विकास योजनाएं जल्द शुरू होंगी, जिनमें वॉच टावर, ट्रैक कैमरे और जल संरक्षण संरचनाएं शामिल हैं। उन्होंने लोगों से वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगलों में आग न लगाने की अपील भी की, ताकि पर्यावरण और मानव जीवन दोनों सुरक्षित रह सकें।
