Jharkhand की राजनीति में मुख्यमंत्री के नए आवास निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने इस मुद्दे पर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एक तरफ राज्य में गरीब लोगों के पास रहने के लिए घर नहीं है वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के लिए 67 करोड़ रुपये की लागत से नया आवास बनाया जा रहा है। इस बयान के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है और विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है।
भाजपा का आरोप और निर्माण लागत पर सवाल
आदित्य साहू ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि नए मुख्यमंत्री आवास का टेंडर 67 करोड़ रुपये का है लेकिन निर्माण पूरा होने तक इसकी लागत करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। उन्होंने इसे राज्य के आदिवासी और मूलवासी जनता की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग बताया। साहू के अनुसार इस परियोजना में लगने वाले संसाधन और खर्च पर पारदर्शिता जरूरी है और जनता को इसका हिसाब मिलना चाहिए।
आलीशान सुविधाओं का मुद्दा और भाजपा का विरोध
भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि नए आवास में अत्याधुनिक सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें दो करोड़ रुपये का फव्वारा, ढाई करोड़ रुपये का गार्डन और विदेश से मंगाया जा रहा शीशे का ड्राइंग रूम शामिल बताया गया है। इसके अलावा इटली से टाइल्स और आधुनिक जकूजी, सोना बाथ तथा मसाज रूम जैसी सुविधाओं पर भी भारी खर्च की बात कही गई है। भाजपा ने इस परियोजना को फिजूलखर्ची बताते हुए इसके खिलाफ प्रदर्शन करने की बात कही है और जनता को जागरूक करने का भी दावा किया है।
कांग्रेस का बचाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
वहीं कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा दोहरा चरित्र दिखा रही है। उनके अनुसार जब भाजपा सत्ता में होती है तो बड़े निर्माण कार्यों को विकास का प्रतीक बताती है और विपक्ष में आते ही उन्हीं कार्यों को फिजूलखर्ची करार देती है। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री आवास का निर्माण प्रशासनिक जरूरत और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है और यह शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है। इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
